राम नवमी 2022 कब है? कैसे करें पूजा, 10 गलतियों से बचें

Ram Navami 2020
Ram Navami 2022
चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवरात्रि प्रारंभ होती है। नवरात्रि के नौवें दिन यानी नवमी के दिन राम नवमी रहती है। इस दिन प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ था। आओ जानते हैं कि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2022 में कब है रामनवमी, कैसे करें पूजा और किन 10 गलतियों से हमें बचना चाहिए।


कब है रामनवमी : अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार रामनवमी 10 अप्रैल को रहेगी। इस दिन रविवार रहेगा।

रामनवमी की सरल पूजा विधि:

1. पूजन में शुद्धता व सात्विकता का विशेष महत्व है, इस दिन प्रात:काल स्नान-ध्यान से निवृत हो भगवान का स्मरण करते हुए भक्त व्रत एवं उपवास का पालन करते हुए भगवान का भजन व पूजन करते हैं।
2. नित्य कर्म से निवृत्त होने के बाद अपने ईष्ट देव या जिसका भी पूजन कर रहे हैं उन देव या भगवान की मूर्ति या चि‍त्र को लाल या पीला कपड़ा बिछाकर लकड़ी के पाट पर रखें। मूर्ति को स्नान कराएं और यदि चित्र है तो उसे अच्छे से साफ करें।

3. पूजन में देवताओं के सामने धूप, दीप अवश्य जलाना चाहिए। देवताओं के लिए जलाए गए दीपक को स्वयं कभी नहीं बुझाना चाहिए।
4. फिर देवताओं के मस्तक पर हलदी कुंकू, चंदन और चावल लगाएं। फिर उन्हें हार और फूल चढ़ाएं। फिर उनकी आरती उतारें। पूजन में अनामिका अंगुली (छोटी उंगली के पास वाली यानी रिंग फिंगर) से गंध (चंदन, कुमकुम, अबीर, गुलाल, हल्दी, मेहंदी) लगाना चाहिए।

5. पूजा करने के बाद प्रसाद या नैवेद्य (भोग) चढ़ाएं। ध्यान रखें कि नमक, मिर्च और तेल का प्रयोग नैवेद्य में नहीं किया जाता है। प्रत्येक पकवान पर तुलसी का एक पत्ता रखा जाता है।
6. अंत में आरती करें। जिस भी देवी या देवता के तीज त्योहार पर या नित्य उनकी पूजा की जा रही है तो अंत में उनकी आरती करके नैवेद्य चढ़ाकर पूजा का समापन किया जाता है। श्रीराम के सबसे प्रिय पदार्थ खीर और फल-मूल को प्रसाद के रूप में तैयार करके पहले से ही रख लें।

7. घर में या मंदिर में जब भी कोई विशेष पूजा करें तो अपने इष्टदेव के साथ ही स्वस्तिक, कलश, नवग्रह देवता, पंच लोकपाल, षोडश मातृका, सप्त मातृका का पूजन भी किया जाता। लेकिन विस्तृत पूजा तो पंडित ही करता है अत: आप ऑनलाइन भी किसी पंडित की मदद से विशेष पूजा कर सकते हैं। विशेष पूजन पंडित की मदद से ही करवाने चाहिए, ताकि पूजा विधिवत हो सके।
8. पूजा के बाद घर की सबसे छोटी महिला अथवा लड़की को घर में सभी जनों के माथे पर तिलक लगाना चाहिए।
10 गलतियां न करें :

1. पूजा के दौरान दीए को गलती से भी बुझाना नहीं चाहिए।

2. घर के ईशान कोण में ही पूजा करें। पूजा के समय हमारा मुंह ईशान, पूर्व या उत्तर में होना चाहिए। अन्य ओर मुख करके पुजा न करें।
3. पूजा का उचित मुहूर्त देखें तभी पूजा करें। बगैर मुहूर्त देखे पूजा न करें।

4. पूजन के समय पंचदेव की स्थापना जरूर करें। सूर्यदेव, श्रीगणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु को पंचदेव कहा गया है।

5. पूजा के समय सभी एकत्रित होकर पूजा करें। पूजा के दौरान किसी भी प्रकार शोर न करें।

6. गणेश पूजा पहले करें इसके बाद ही श्रीराम पूजा करें।

7. पूजा के दौरान कोई भी झूठा बर्तन, जूते चप्पल और चमड़े का सामान अपने पास न रखें। ध्यान रखें कि अपके पास कोई भी ऐसी वस्तु न हो जो अनुचित हो।

8. पूजा की थाली मे बासी फूल और बासी भोग भी नहीं रखना चाहिए।

9. पूजा के दौरान खंडित अक्षत या खंडित मूर्ति नहीं होना चाहिए।

10. देवताओं की युद्ध करते हुए मुर्तियां या चित्र नहीं होना चाहिए। देवी लक्ष्मी की खड़ी हुई मूद्रा में मूर्ति या तस्वीर नहीं होना चाहिए।



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