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सीता माता के बारे में 10 रहस्य, महिलाओं को जानना जरूरी

रविवार,मई 12, 2019
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श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदासजी ने मुख्य रूप से श्रीराम के पैर के 5 ही चिह्न का वर्णन किया है- ध्वज, वज्र, अंकुश, कमल और ऊर्ध्व रेखा। किंतु अन्य पवित्र ग्रंथों को मिलाकर देखा जाए तो 48 पवित्र चिह्न मिलते हैं। दक्षिण पैर में 24 और वाम पैर में ...
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'श्री राम जय राम जय जय राम' - यह सात शब्दों वाला तारक मंत्र है। साधारण से दिखने वाले इस मंत्र में जो शक्ति छिपी हुई है, वह अनुभव का विषय है। इसे कोई भी, कहीं भी, कभी भी कर सकता है। फल बराबर मिलता है।
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भगवान् शंकरजी ने मानस की चौपाइयों को मंत्र-शक्ति प्रदान की है- इसलिए भगवान शंकर को साक्षी बनाकर इनका श्रद्धा से जप करना चाहिए।
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श्रीराम का व्यक्तित्व जितना सरल है उतना ही उन्हें प्रसन्न करना भी आसान है। आइए जानें कुछ सरलतम उपाय श्रीराम को प्रसन्न करने के...
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इस वर्ष 6 अप्रैल 2019 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हुई है, और कैलेंडर के अनुसार 14 अप्रैल को रामनवमी का पर्व मनाया जाना चाहिए। परन्तु कई लोगों में इसे लेकर मतभेद हैं कि रामनवमी 13 अप्रैल शनिवार के दिन मनाई जाए या फिर 14 अप्रैल रविवार के दिन?
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ॐ अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः। श्री सीतारामचंद्रो देवता । अनुष्टुप्‌ छंदः। सीता शक्तिः। श्रीमान हनुमान्‌ कीलकम्‌ । श्री सीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः।
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महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति हेतु यज्ञ आरंभ करने की ठानी। महाराज की आज्ञानुसार श्यामकर्ण घोड़ा चतुरंगिनी सेना के साथ छुड़वा दिया गया। महाराज दशरथ ने समस्त मनस्वी, तपस्वी, विद्वान ऋषि-मुनियों तथा वेदविज्ञ प्रकाण्ड पण्डितों को यज्ञ सम्पन्न कराने के ...
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जो शिव का द्रोह कर के मुझे प्राप्त करना चाहता है वह सपने में भी मुझे प्राप्त नहीं कर सकता। इसीलिए शिव आराधना के साथ श्रीरामचरितमानस पाठ का बहुत महत्व होता है।
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जो राष्ट्र का मंगल करें, वही राम है। जो लोकमंगल की कामना करें, वही राम है। सबसे आदर्श और मर्यादित व्यक्तित्व ही श्रीराम है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन संघर्षमय रहा। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने मर्यादा नहीं छो़ड़ी
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श्रीराम आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। क्योंकि उनकी कार्यप्रणाली का ही दूसरा नाम-'प्रजातंत्र' है। उनकी कार्यप्रणाली को समझने से पहले 'श्रीराम' को समझना होगा।
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श्री राम रक्षा स्तोत्र मंत्र के रचयिता बुध कौशिक ऋषि हैं, सीता और रामचंद्र देवता हैं, अनुष्टुप छंद हैं, सीता शक्ति हैं, हनुमान जी कीलक है तथा श्री रामचंद्र जी की प्रसन्नता के लिए राम रक्षा स्तोत्र के जप में विनियोग किया जाता हैं।
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राम नवमी के दिन प्रुभ श्री राम के पूजन एवं आरती के उपरां‍‍त नैवेद्य अथवा भोग को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। इस दिन व्रत-उपवास रखने के साथ ही अगर आप इन पारंपरिक व्यंजन से प्रभु श्री राम को नैवेद्य चढ़ाएंगे तो निश्‍चित ही आपके जीवन खुशियों से भर ...
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श्रीराम नाम के दो अक्षरों में 'रा' तथा 'म' ताली की आवाज की तरह हैं, जो संदेह के पंछियों को हमसे दूर ले जाती हैं। ये हमें देवत्व शक्ति के प्रति विश्वास से ओत-प्रोत करते हैं।
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जानिए भगवान राम के 5 ऐसे गुण जिनकी वजह से वे जीवन में सफल माने गए...
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जीवन के भवसागर से पार पाने के लिए हर मनुष्य को प्रतिदिन राम चालीसा और हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए। अगर आप प्रतिदिन नहीं कर पा रहे हैं तो राम नवमी के दिन अवश्‍य इस चालीसा का पाठ करना चाहिए।
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श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्। नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।। कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्। पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।
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आप अपने मतानुसार श्रीराम नवमी मनाएं लेकिन प्रामाणिक पूजन विधि यही रखें जो हम आपके लिए लेकर आए हैं।
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रामनवमी पर भगवान श्रीराम की अपने जन्म लग्नानुसार आराधना करने का अत्यधिक लाभ मिलता है। विशेषकर रामनवमी के दिन 12 बजे भगवान श्रीरामजी की आराधना करना चाहिए। आइए जानें आपका मं‍त्र कौन सा है?
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श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भाव भय दारुणम्। नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।
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