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प्रभु श्रीराम के जन्म समय के संबंध में मतभेद क्यों हैं?

Updated: शनिवार, 13 अप्रैल 2024 (12:23 IST)
Ram Navami 2024: प्रभु श्रीराम का जन्म जनवरी में हुआ था, चैत्र शुक्ल नवमी को या आश्‍विन माह की शुक्ल नवमी को? लाखों वर्ष पहले जन्म हुआ था या कि हजारों वर्ष पहले? पुराण क्या कहते हैं और नए शोध क्या कहते हैं? हो सकता है कि कुछ लोगों को यह अच्‍छा लगता हो कि राम लाखों वर्ष पहले हुए थे जिससे यह सिद्ध होता है कि यह धर्म भी लाखों वर्ष पुराना है? क्या यह सच है? आओ जानते हैं सभी का मत। 
 
वाल्मीकि रामायण के अनुसार : वाल्मीकि जी अपनी रामायण में लिखते हैं कि श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी तिथि एवं पुनर्वसु नक्षत्र में जब पांच ग्रह अपने उच्च स्थान में थे तब हुआ था। इस प्रकार सूर्य मेष में 10 डिग्री, मंगल मकर में 28 डिग्री, बृहस्पति कर्क में 5 डिग्री पर, शुक्र मीन में 27 डिग्री पर एवं शनि तुला राशि में 20 डिग्री पर था। (बाल कांड 18/श्लोक 8, 9)।
 
पुराणों के अनुसार : पुराणों के अनुसार प्रभु श्रीराम का जन्म त्रेतायुग और द्वापर युग के संधिकाल में हुआ था। कलियुग का प्रारंभ 3102 ईसा पूर्व से हुआ था। इसका मतलब 3102+2024= 5126 वर्ष कलियुग के बित चुके हैं। उपरोक्त मान से अनुमानित रूप से भगवान श्रीराम का जन्म द्वापर के 864000 + कलियुग के 5126 वर्ष = 869124 वर्ष अर्थात 8 लाख 69 हजार 124 वर्ष हो गए हैं प्रभु श्रीराम को हुए।
 
युग की धारण : युग की धारणा हमें पुराण और ज्योतिष में 3 तरह से मिलती है। पहली वह जिसमें एक युग लाखों वर्ष का होता है और दूसरी वह जिसमें एक युग 5 वर्ष का होता है और तीसरी वह जिसमें एक युग 1250 वर्ष का है, लेकिन पुराणों में जिन चार युगों की बात कही गई है वह लाखों वर्ष के हैं। जैसे सतयुग लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष, त्रेतायुग 12 लाख 96 हजार वर्ष, द्वापर युग 8 लाख 64 हजार वर्ष और कलियुग 4 लाख 32 हजार वर्ष का बताया गया है। 
आधुनिक शोध के अनुसार : उपरोक्त धारणा से भिन्न आधुनिक शोध पर आधारित धारणा ज्यादा सही लगती है। इस शोध का आधार वाल्मीकि रामायण में बताई गई खगोलीय स्थिति और देशभर में बिखरे सबूत हैं। उन सबूतों का कार्बन डेटिंग के आधार पर जांच कर उसका मिलान रामायण में बताए गए घटनाक्रम से किया गया है। इस शोधानुसार 5114 ईसा पूर्व 10 जनवरी को दिन के 12.05 पर भगवान राम का जन्म हुआ था जबकि सैंकड़ों वर्षों से चैत्र मास (मार्च) की नवमी को रामनवमी के रूप में मनाया जाता रहा है। लेकिन एक समय ऐसा था जबकि चैत्र नवमी उस काल में जनवरी में आती थी। यानी आज जैसे चैत्र माह मार्च और अप्रैल के बीच प्रारंभ होता है उसी तरह उस दौर में यह माह दिसंबर जनवरी के बीच प्रारंभ होता था। जैसे सालों से 14 जनवरी को मकर सक्रांति का पर्व मनाया जाता रहा है लेकिन अब यह 15 जनवरी को भी आने लगी और सालों बाद मकर संक्रांति 14 मार्च में भी आने लगेगी।
 
शोधकर्ता डॉ. वर्तक पीवी वर्तक के अनुसार ऐसी स्थिति 7323 ईसा पूर्व दिसंबर में ही निर्मित हुई थी, लेकिन प्रोफेसर तोबयस के अनुसार जन्म के ग्रहों के विन्यास के आधार पर 10 जनवरी 5114 ईसा पूर्व हुआ था। उनके अनुसार ऐसी आका‍शीय स्थिति तब भी बनी थी। तब 12 बजकर 25 मिनट पर आकाश में ऐसा ही दृष्य था जो कि वाल्मीकि रामायण में वर्णित है। ज्यातादर शोधकर्ता प्रोफेसर तोबयस के शोध से सहमत हैं। इसका मतलब यह कि राम का जन्म 10 जनवरी को 12 बजकर 25 मिनट पर 5114 ईसा पूर्व हुआ था।
राम की वंशावली के आधार पर : वंशावली के जानकर लाखों वर्ष के युग की धारणा को कल्पित मानते हैं। क्योंकि पहली बात तो यह कि युग का मान स्पष्ट नहीं है। दूसरी बात यह कि यदि आप भगवान श्रीराम की वंशावली के मान से गणना करते हैं तो यह लाखों नहीं हजारों वर्ष की बैठती है। जैसे श्रीराम के बाद उनके पुत्र लव और कुश हुए फिर उनकी पीढ़ियों में आगे चलकर महाभारत काल में 50वीं पीढ़ी में शल्य हुए। इसके अलावा शल्य के बाद बहत्क्षय, ऊरुक्षय, बत्सद्रोह, प्रतिव्योम, दिवाकर, सहदेव, ध्रुवाश्च, भानुरथ, प्रतीताश्व, सुप्रतीप, मरुदेव, सुनक्षत्र, किन्नराश्रव, अन्तरिक्ष, सुषेण, सुमित्र, बृहद्रज, धर्म, कृतज्जय, व्रात, रणज्जय, संजय, शाक्य, शुद्धोधन, सिद्धार्थ, राहुल, प्रसेनजित, क्षुद्रक, कुलक, सुरथ, सुमित्र हुए।
 
वर्तमान में जो सिसोदिया, कुशवाह (कछवाह), मौर्य, शाक्य, बैछला (बैसला) और गैहलोत (गुहिल) आदि जो राजपूत वंश हैं वे सभी भगवान प्रभु श्रीराम के वंशज है। जयपूर राजघराने की महारानी पद्मिनी और उनके परिवार के लोग की राम के पुत्र कुश के वंशज है। महारानी पद्मिनी ने एक अंग्रेजी चैनल को दिए में कहा था कि उनके पति भवानी सिंह कुश के 309वें वंशज थे। अब यदि तीन पीढ़ियों का काल लगभग 100 वर्ष में पूर्ण होता है तो इस मान से श्रीराम को हुए कितने हजार वर्ष हुए हैं आप इस 309 पीढ़ी के मान से अनुमान लगा सकते हैं। अनुमानत: यह 4000 ईसा पूर्व का समय बैठता है।
 
निष्कर्श- राम का जन्म लाखों वर्ष पूर्व नहीं, कुछ हजारों वर्ष पूर्व ही हुआ था। हमें इस दिशा में शोध और विचार करने की जरूर है। राम एक ऐतिहासिक व्यक्ति हैं और उन पर विरोधाभाष पैदा करना उचित नहीं होगा। जरूरत है कि पुराण और अन्य ग्रंथों की बातों को छोड़कर वाल्मीकि रामायण में जो लिखा है उसे सत्य माना जाए। क्योंकि महर्षि वाल्मीकि ने ही भगवान राम और उनके काल के बारे में उचित वर्णन किया है।
 
-संदर्भ : (वैदिक युग एवं रामायण काल की ऐतिहासिकता: सरोज बाला, अशोक भटनाकर, कुलभूषण मिश्र)

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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