dharma sangrah

श्रीराम की आराधना करें शिव के साथ, जानिए क्यों

Updated: सोमवार, 3 अप्रैल 2017 (15:01 IST)
'भगवान शिव' राम के इष्ट एवं 'राम' शिव के इष्ट हैं। ऐसा संयोग इतिहास में नहीं मिलता कि उपास्य और उपासक में परस्पर इष्ट भाव हो इसी स्थिति को संतजन 'परस्पर देवोभव' का नाम देते हैं। 
 
ALSO READ: श्रीराम ने तोड़ा था भगवान शंकर का पिनाक धनुष
 
 शिव का प्रिय मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' एवं 'श्रीराम जय राम जय जय राम' मंत्र का उच्चारण कर शिव को जल चढ़ाने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं। 
 
भगवान राम ने स्वयं कहा है : 
 
'शिव द्रोही मम दास कहावा सो नर मोहि सपनेहु नहि पावा।' 
 
- अर्थात्‌ जो शिव का द्रोह कर के मुझे प्राप्त करना चाहता है वह सपने में भी मुझे प्राप्त नहीं कर सकता। इसीलिए शिव आराधना के साथ श्रीरामचरितमानस पाठ का बहुत महत्वपूर्ण होता है। 

ALSO READ: राम रक्षा स्तोत्र : धन व समृद्धि के लिए जरूर करें
 
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम 14 वर्ष के वनवास काल के बीच जब जाबालि ऋषि की तपोभूमि मिलने आए तब भगवान गुप्त प्रवास पर नर्मदा तट पर आए। उस समय यह पर्वतों से घिरा था। रास्ते में भगवान शंकर भी उनसे मिलने आतुर थे, लेकिन भगवान और भक्त के बीच वे नहीं आ रहे थे। भगवान राम के पैरों को कंकर न चुभें इसीलिए शंकरजी ने छोटे-छोटे कंकरों को गोलाकार कर दिया। इसलिए कंकर-कंकर में शंकर बोला जाता है। 
 
जब प्रभु श्रीराम रेवा तट पर पहुंचे तो गुफा से नर्मदा जल बह रहा था। श्रीराम यहीं रुके और बालू एकत्र कर एक माह तक उस बालू का नर्मदा जल से अभिषेक करने लगे। आखिरी दिन शंकरजी वहां स्वयं विराजित हो गए और भगवान राम-शंकर का मिलन हुआ। 
 
ALSO READ: मनचाहा धन चाहें तो रामनवमी के दिन यह करें, पढ़ें 10 बातें
 
शिवप्रिय मैकल सैल सुता सी, सकल सिद्धि सुख संपति राशि..., रामचरित मानस की ये पंक्तियां श्रीराम और शिव के चरण पड़ने की साक्षी है।
Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Paryushana festival 2026: जैन धर्म के पर्युषण व्रत होंगे प्रारंभ,जनिए महत्व

जया एकादशी 2026: व्रत रखने के 5 अद्भुत फायदे जो जीवन बदल देंगे

Weekly Numerology Horoscope: साप्ताहिक अंक भविष्यफल 7 सितंबर से 13 सितंबर 2026: आपके मूलांक का सटीक राशिफल, जानें करियर, धन, प्रेम और स्वास्थ्य का हाल

बुध का उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में गोचर: 3 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की और धन के रास्ते

बछ बारस 2026: क्यों मनाया जाता है यह पर्व? जानिए गाय-बछड़े की पूजा का महत्व, विधि और पौराणिक कथा

अगला लेख