sundarkand

मजबूत डोर

Updated: बुधवार, 1 अक्टूबर 2014 (19:43 IST)
ND
भाई और बहन
का रिश्ता
मजबूत डोर से बँधा
होता है
जिसे तोड़ना
आसान ही नहीं
नामुमकिन होता है।

प्यार और स्नेह से भरा
धागों की डोर से बँधा
यह रिश्ता
बहुत खास होता है।

लेकिन जीवन के कुछ क्षणों में
हुई अनबन से यह रिश्ता
थोड़ा-सा हिल-डुल तो सकता है
लेकिन टूट नहीं सकता
झुक नहीं सकता।

मजबूत रिश्तों की यह डोर
इंसान को बाँधे रखती है
एक-दूजे के स्नेह बंधन में
भाई-बहन और उनका प्यार ।

अजर-अमर हो जाता है
जब वह रिश्तों की
इस मजबूर डोर में
अपना जीवन बाँध
लेता है।

लेखक के बारे में
राजश्री कासलीवाल
श्रीमती राजश्री कासलीवाल पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव। धर्म, व्रत-त्योहार, ज्योतिष, रेसिपी, साहित्य, लाइफ स्टाइल और अन्य विषयों पर लेखन का कार्य। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सीनियर सब-एडिटर (कंटेंट) के पद पर कार्यरत हैं।  .... और पढ़ें
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