ramcharitmanas

वट सावित्री पूर्णिमा पर कैसे करें पूजन, जानिए

Updated: बुधवार, 15 जून 2016 (15:42 IST)
वट सावित्री पूर्णिमा सौभाग्यवती महिलाओं का पर्व


 
पौराणिक शास्त्रों के अनुसार जेष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को वट सावित्री के पूजन का विधान है। इस दिन महिलाएं दीर्घ सुखद वैवाहिक जीवन की कामना से वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर व्रत करती हैं।
 
लोककथा है कि सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे पड़े अपने मृत पति सत्यवान को यमराज से जीत लिया था। सावित्री के दृढ़ निश्चय व संकल्प की याद में इस दिन महिलाएं सुबह से स्नान कर नए वस्त्र पहनकर, सोलह श्रृंगार करती हैं। वट वृक्ष की पूजा करने के बाद ही वे जल ग्रहण करती हैं।

इस प्रकार करें वट सावित्री पूजन...  
 
* इस पूजन में महिलाएं चौबीस बरगद फल (आटे या गुड़ के) और चौबीस पूरियां अपने आंचल में रखकर बारह पूरी व बारह बरगद वट वृक्ष में चढ़ा देती हैं।
 
* वृक्ष में एक लोटा जल चढ़ाकर हल्दी-रोली लगाकर फल-फूल, धूप-दीप से पूजन करती हैं।
 
* कच्चे सूत को हाथ में लेकर वे वृक्ष की बारह परिक्रमा करती हैं।
 
* हर परिक्रमा पर एक चना वृक्ष में चढ़ाती जाती हैं और सूत तने पर लपेटती जाती हैं।
 
* परिक्रमा पूरी होने के बाद सत्यवान व सावित्री की कथा सुनती हैं।
 
* फिर बारह तार (धागा) वाली एक माला को वृक्ष पर चढ़ाती हैं और एक को गले में डालती हैं। छः बार माला को वृक्ष से बदलती हैं, बाद में एक माला चढ़ी रहने देती हैं और एक पहन लेती हैं। जब पूजा समाप्त हो जाती है तब महिलाएं ग्यारह चने व वृक्ष की बौड़ी (वृक्ष की लाल रंग की कली) तोड़कर जल से निगलती हैं। इस तरह व्रत समाप्त करती हैं।
 
इसके पीछे यह कथा है कि सत्यवान जब तक मरणावस्था में थे तब तक सावित्री को अपनी कोई सुध नहीं थी लेकिन जैसे ही यमराज ने सत्यवान को प्राण दिए, उस समय सत्यवान को पानी पिलाकर सावित्री ने स्वयं वट वृक्ष की बौंडी खाकर पानी पिया था।



Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 26 अगस्‍त 2026: बुधवार का पंचांग और शुभ समय

अंक दर्शन : 2026 की राखी और संस्कारों में छिपी ग्रह ऊर्जा

चातुर्मास 2026: प्रथम के बाद द्वितीय चातुर्मास प्रारंभ, जानिए इस माह क्या करें और क्या नहीं

Rakhi mithai: रक्षाबंधन स्पेशल फूड: इस राखी भाई को खिलाएं ये खास 5 मिठाइयां

रक्षाबंधन 2026: भाई की कलाई पर सजाएं उसकी राशि के अनुसार लकी राखी

अगला लेख