1. धर्म-संसार
  2. व्रत-त्योहार
  3. अन्य त्योहार
  4. Skanda Sashti 2019

19 अक्टूबर को स्कंद षष्ठी व्रत : जानिए महत्व, पूजन विधि एवं मंत्र Skanda Sashti19 October 2019

Skanda Sashti
19 अक्टूबर 2019, शनिवार को स्कंद षष्ठी व्रत मनाया जा रहा है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी ति‍थि को स्कंद षष्ठी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े पुत्र कार्तिकेय की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। 
 
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान कार्तिकेय षष्ठी तिथि और मंगल ग्रह के स्वामी हैं तथा दक्षिण दिशा में उनका निवास स्थान है। इसीलिए जिन जातकों की कुंडली में कर्क राशि अर्थात् नीच का मंगल होता है, उन्हें मंगल को मजबूत करने तथा मंगल के शुभ फल पाने के लिए इस दिन भगवान कार्तिकेय का व्रत करना चाहिए। क्योंकि स्कंद षष्ठी भगवान कार्तिकेय को प्रिय होने के जातकों को इस दिन व्रत अवश्य करना चाहिए। 
 
पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिकेय अपने माता-पिता और छोटे भाई श्री गणेश से नाराज होकर कैलाश पर्वत छोड़कर मल्लिकार्जुन (शिव जी के ज्योतिर्लिंग) आ गए थे और कार्तिकेय ने स्कंद षष्ठी को ही दैत्य तारकासुर का वध किया था तथा इसी तिथि को कार्तिकेय देवताओं की सेना के सेनापति बने थे। 
 
भगवान कार्तिकेय को चंपा के फूल पसंद होने के कारण ही इस दिन को स्कंद षष्‍ठी के अलावा चंपा षष्ठी भी कहते हैं। भगवान कार्तिकेय का वाहन मोर है। ज्ञात हो कि स्कंद पुराण कार्तिकेय को ही समर्पित है। स्कंद पुराण में ऋषि विश्वामित्र द्वारा रचित कार्तिकेय 108 नामों का भी उल्लेख हैं। इस दिन निम्न मंत्र से कार्तिकेय का पूजन करने का विधान है। खासकर दक्षिण भारत में इस दिन भगवान कार्तिकेय के मंदिर के दर्शन करना बहुत शुभ माना गया है। चंपा षष्ठी का त्योहार दक्षिण भारत, कर्नाटक, महाराष्ट्र आदि में प्रमुखता से मनाया जाता है। कार्तिकेय को स्कंद देव, मुरुगन, सुब्रह्मन्य नामों से भी जाना जाता है।
 
स्कंद षष्ठी पूजन विधि : 
 
* स्कंद षष्ठी के दिन व्रतधारी व्यक्तियों को दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके भगवान कार्तिकेय का पूजन करना चाहिए। 
 
* पूजन में घी, दही, जल और पुष्प से अर्घ्य प्रदान करना चाहिए। 
 
* रात्रि में भूमि पर शयन करना चाहिए। 
 
भगवान कार्तिकेय की पूजा का मंत्र - 
 
* 'देव सेनापते स्कंद कार्तिकेय भवोद्भव। 
कुमार गुह गांगेय शक्तिहस्त नमोस्तु ते॥' 
 
शत्रु नाश के लिए पढ़ें ये मंत्र-  
 
*  ॐ शारवाना-भावाया नम:
ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा वल्लीईकल्याणा सुंदरा
देवसेना मन: कांता कार्तिकेया नामोस्तुते।
 
इसके अलावा स्कंद षष्ठी एवं चंपा षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय के इन मंत्रों का जाप भी किया जाना चाहिए। 
 
* कार्तिकेय गायत्री मंत्र- 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कंदा प्रचोदयात'। यह मंत्र हर प्रकार के दुख एवं कष्टों के नाश के लिए प्रभावशाली है। 
 
इस तरह से भगवान कार्तिकेय का पूजन-अर्चन करने से जीवन के सभी कष्‍टों से मुक्ति मिलती है।


 
लेखक के बारे में
राजश्री कासलीवाल
Writing in Hindi on various topics, including life style, religion, and astrology.... और पढ़ें
अगला लेख
भगवान कार्तिकेय की आरती : जय जय आरती वेणु गोपाला