dharma sangrah

आपने नहीं पढ़ी होगी रवि प्रदोष व्रत की यह पौराणिक कथा....

Updated: शनिवार, 16 सितम्बर 2017 (15:56 IST)
एक समय सर्व प्राणियों के हितार्थ परम पावन भागीरथी के तट पर ऋषि समाज द्वारा विशाल गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस सभा में व्यासजी के परम शिष्य पुराणवेत्ता  सूतजी महाराज हरि कीर्तन करते हुए पधारे। 
 
सूतजी को आते हुए देखकर शौनकादि 88,000 ऋषि-मुनियों ने खड़े होकर दंडवत प्रणाम किया। महाज्ञानी सूतजी ने भक्तिभाव से ऋषियों को हृदय से लगाया तथा आशीर्वाद दिया।  विद्वान ऋषिगण और सब शिष्य आसनों पर विराजमान हो गए।
 
शौनकादि ऋषि ने पूछा- हे पूज्यवर महामते! कृपया यह बताने का कष्ट करें कि मंगलप्रद, कष्ट निवारक यह व्रत सबसे पहले किसने किया और उसे क्या फल प्राप्त हुआ? 
 
श्री सूतजी बोले- आप सभी शिव के परम भक्त हैं, आपकी भक्ति को देखकर मैं व्रती  मनुष्यों की कथा कहता हूं। ध्यान से सुनो।
 
रवि प्रदोष कथा
 
एक गांव में अति दीन ब्राह्मण निवास करता था। उसकी साध्वी स्त्री प्रदोष व्रत किया  करती थी। उसे एक ही पुत्ररत्न था। एक समय की बात है, वह पुत्र गंगा स्नान करने के  लिए गया। दुर्भाग्यवश मार्ग में चोरों ने उसे घेर लिया और वे कहने लगे कि हम तुम्हें  मारेंगे नहीं, तुम अपने पिता के गुप्त धन के बारे में हमें बतला दो। 
 
बालक दीनभाव से कहने लगा कि बंधुओं! हम अत्यंत दु:खी दीन हैं। हमारे पास धन कहां  है? 
 
तब चोरों ने कहा कि तेरे इस पोटली में क्या बंधा है? 
 
बालक ने नि:संकोच कहा कि मेरी मां ने मेरे लिए रोटियां दी हैं।
 
यह सुनकर चोरों ने अपने साथियों से कहा कि साथियों! यह बहुत ही दीन-दु:खी मनुष्य है  अत: हम किसी और को लूटेंगे। इतना कहकर चोरों ने उस बालक को जाने दिया। 
 
बालक वहां से चलते हुए एक नगर में पहुंचा। नगर के पास एक बरगद का पेड़ था। वह  बालक उसी बरगद के वृक्ष की छाया में सो गया। उसी समय उस नगर के सिपाही चोरों को  खोजते हुए उस बरगद के वृक्ष के पास पहुंचे और बालक को चोर समझकर बंदी बना राजा  के पास ले गए। राजा ने उसे कारावास में बंद करने का आदेश दिया। 
 
ब्राह्मणी का लड़का जब घर नहीं लौटा, तब उसे अपने पुत्र की बड़ी चिंता हुई। अगले दिन  प्रदोष व्रत था। ब्राह्मणी ने प्रदोष व्रत किया और भगवान शंकर से मन-ही-मन अपने पुत्र  की कुशलता की प्रार्थना करने लगी। 
 
भगवान शंकर ने उस ब्राह्मणी की प्रार्थना स्वीकार कर ली। उसी रात भगवान शंकर ने उस  राजा को स्वप्न में आदेश दिया कि वह बालक चोर नहीं है, उसे प्रात:काल छोड़ दें अन्यथा  उसका सारा राज्य-वैभव नष्ट हो जाएगा। 
 
प्रात:काल राजा ने शिवजी की आज्ञानुसार उस बालक को कारावास से मुक्त कर दिया।  बालक ने अपनी सारी कहानी राजा को सुनाई। 
 
सारा वृत्तांत सुनकर राजा ने अपने सिपाहियों को उस बालक के घर भेजा और उसके  माता-पिता को राजदरबार में बुलाया। उसके माता-पिता बहुत ही भयभीत थे। राजा ने उन्हें  भयभीत देखकर कहा कि आप भयभीत न हो। आपका बालक निर्दोष है। राजा ने ब्राह्मण  को 5 गांव दान में दिए जिससे कि वे सुखपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर सकें। भगवान  शिव की कृपा से ब्राह्मण परिवार आनंद से रहने लगा। 
 
अत: जो भी मनुष्य रवि प्रदोष व्रत को करता है, वह सुखपूर्वक और निरोगी होकर अपना पूर्ण जीवन व्यतीत करता है।

ALSO READ: अच्छा स्वास्थ्य देता है रवि प्रदोष व्रत, इस तरह करें पूजन
 

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

सिंह राशि में बुधादित्य योग से 5 राशियों का चमकेगा भाग्य, खुलेंगे सफलता के द्वार

सितंबर माह 2026: इस माह के प्रमुख व्रत और त्योहारों की पूरी लिस्ट

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 28 अगस्‍त 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

भाद्रपद मास का महत्व और पौराणिक कथा

लव-कुश जयंती 2026: प्रभु श्रीराम के जुड़वा पुत्र लव-कुश के बारे में जानें 5 खास बातें

अगला लेख