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पांडव पंचमी 2019 : पांडवों के जन्म की रोचक कथा और कलियुग में कहां जन्में थे पांडव

Updated: गुरुवार, 31 अक्टूबर 2019 (15:54 IST)
कलियुग कार्तिक मास की शुक्ल पंचमी तिथि को पांडव पंचमी पर्व के रूप में मनाया जाता है। पांडु के पुत्र होने के कारण महाभारत के पांचों योद्धाओं को पांडव कहा जाता था। आज इनके जन्म के संबंध में जानते हैं रोचक कथा।

 
महाभारत के आदिपर्व के अनुसार एक दिन राजा पांडु आखेट के लिए निकलते हैं। जंगल में दूर से देखने पर उनको एक हिरण दिखाई देता है। वे उसे एक तीर से मार देते हैं। वह हिरण एक ऋषि किंदम निकलते हैं तो अपनी पत्नी के साथ मैथुनरत थे। वे ऋषि मरते वक्त पांडु को शाप देते हैं कि तुम भी मेरी तरह मरोगे, जब तुम मैथुनरत रहोगे। इस शाप के भय से पांडु अपना राज्य अपने भाई धृतराष्ट्र को सौंपकर अपनी पत्नियों कुंती और माद्री के साथ जंगल चले जाते हैं।
 
जंगल में वे संन्यासियों का जीवन जीने लगते हैं, लेकिन पांडु इस बात से दुखी रहते हैं कि उनकी कोई संतान नहीं है और वे कुंती को समझाने का प्रयत्न करते हैं कि उसे किसी ऋषि के साथ समागम करके संतान उत्पन्न करनी चाहिए। 
 
लाख समझाने के बाद तब कुंति मंत्र शक्ति के बल पर एक-एक कर 3 देवताओं का आह्वान कर 3 पुत्रों को जन्म देती है। धर्मराज से युधिष्टिर, इंद्र से अर्जुन, पवनदेव से भीम को जन्म देती है। कुंती उसी मंत्र को माद्री को भी सिखा देती है।
 
माद्री भी इसी मंत्र शक्ति के बल पर अश्विन कुमारों का आह्वान कर नकुल और सहदेव को जन्म देती हैं। इसका मतलब यह कि पांडु पुत्र असल में पांडु पुत्र नहीं थे। इसके पहले उसी तरह कुंती अपनी कुंवारी अवस्था में सूर्यदेव का आह्‍वान कर कर्ण को जन्म देती हैं इस तरह कुंति के 4 और माद्री के 2 पुत्र मिलाकर कुल 6 पु‍त्र होते हैं।
 
युधिष्ठर धर्मात्मा एवं सत्यवादी थे। भीम अपनी शक्ति तथा भूख के लिए जाने जाते थे। अर्जुन महान् धर्नुधर के रूप में विश्व विख्यात थे। नकुल निपुण घुड़सवार और पशुओं के विशेषज्ञ थे जबकि सहदेव निपुण तलवार भांजक थे। कर्ण के बारे में सभी जानते हैं कि वे सूर्य पुत्र होने के साथ ही कवच कुंडल लेकर पैदा हुए थे और वे सबसे बड़े दानवीर थे।
 
भविष्य पुराण के अनुसार पांडवों ने कलियुग भी जन्म लिया था। 
1.युधिष्ठिर का जन्म वत्सराज नाम के राजा के पुत्र के रूप में हुआ। उनका नाम मलखान था।
2.भीम का जन्म वीरण नाम से हुआ जो वनरस नाम के राज्य के राजा बने।
3.अर्जुन का जन्म परिलोक नाम के राजा के यहां हुआ। उनका नाम ब्रह्मानन्द था।
4.नकुल का जन्म कान्यकुब्ज के राजा रत्नभानु के यहां हुआ, उनका नाम लक्ष्मण था।
5.सहदेव ने भीमसिंह नामक राजा के घर में देवीसिंह के नाम से जन्म लिया।
6.दानवीर कर्ण ने तारक नाम के राजा के रूप में जन्म लिया।
7.कहते हैं कि धृतराष्ट्र का जन्म अजमेर में पृथ्वीराज के रूप में हुआ और द्रोपदी ने उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिए था जिसका नाम वेला था।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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