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Kevat Jayanti 2023: केवट कौन थे? क्यों मनाई जाती है केवट जयंती? क्या करते हैं इस दिन?

Updated: शनिवार, 13 मई 2023 (14:57 IST)
Kevat Jayanti 2023: भारत के निषाद समाज, केवट समाज और मछुआरा समाज के लिए केवट जयंती मनाते हैं। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार 15 मई को है केवट जयंती। इस दिन को हर राज्य में अलग अलग तरह से वहां की परंपरा के हिसाब से मनाया जाता है। यह केवट कौन थे? क्यों मनाई जाती है इनकी जयंती और क्या कहते हैं इस दिन।
 
कौन थे केवट?
गुहराज निषादजी ने अपनी नाव में प्रभु श्रीराम को गंगा के उस पार उतारा था। वे केवट थे अर्थात नाव खेने वाले। निषादराज गुह मछुआरों और नाविकों के मुखिया थे। श्रीराम को जब वनवास हुआ तो वे सबसे पहले तमसा नदी पहुंचे, जो अयोध्या से 20 किमी दूर है। इसके बाद उन्होंने गोमती नदी पार की और प्रयागराज (इलाहाबाद) से 20-22 किलोमीटर दूर वे श्रृंगवेरपुर पहुंचे, जो निषादराज गुह का राज्य था। यहीं पर गंगा के तट पर उन्होंने केवट से गंगा पार करने को कहा था।
 
क्यों मनाई जाती है केवट जयंती?
पंचांग भेद से चैत्र शुक्ल पंचमी, वैशाख कृष्ण चतुर्थी, बैशाख कृष्ण अष्टमी और ज्येष्ठ कृष्ण एादशी के दिन केवट समाज गुहराज निषादजी की जयंती मनाता है। 
क्या करते हैं इस दिन?
 
निषादराज केवट का वर्णन रामायण के अयोध्याकाण्ड में किया गया है।
मागी नाव न केवटु आना। कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना॥
चरन कमल रज कहुं सबु कहई। मानुष करनि मूरि कछु अहई॥
 
श्रीराम ने केवट से नाव मांगी, पर वह लाता नहीं है। वह कहने लगा- मैंने तुम्हारा मर्म जान लिया। तुम्हारे चरण कमलों की धूल के लिए सब लोग कहते हैं कि वह मनुष्य बना देने वाली कोई जड़ी है। वह कहता है कि पहले पांव धुलवाओ, फिर नाव पर चढ़ाऊंगा।
 
प्रभु श्रीराम ने नाव उतराई के लिए केवटी जो अंगुठी देना चाहिए परंतु उन्होंने इनकार कर दिया और चरण पकड़कर कहा कि जिस तरह मैंने आज आपको इस पार उतारा है आप भी मुझे इस भवसागर के उस पार उतार देना प्रभु।

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