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24 फरवरी जानकी जयंती : माता सीता की पूजा-उपासना कैसे करें, जानिए मंत्र, चालीसा और उपाय

Updated: गुरुवार, 24 फ़रवरी 2022 (10:42 IST)
Janaki Jayanti
 
निर्णय सिंधु पुराण के अनुसार- 
फाल्गुनस्य च मासस्य कृष्णाष्टम्यां महीपते।
जाता दाशरथे: पत्‍‌नी तस्मिन्नहनि जानकी॥
अर्थात्- फाल्गुन कृष्ण अष्टमी के दिन प्रभु श्री राम की पत्नी जनकनंदिनी प्रकट हुई थीं। इसीलिए इस तिथि को सीता अष्टमी के नाम से जाना जाता है। 
 
पौराणिक धार्मिक ग्रंथों के अनुसार फाल्गुन कृष्ण अष्टमी तिथि को माता सीता धरती पर अवतरित हुए थी। इसीलिए इस दिन श्री जानकी जयंती (Janaki Jayanti 2022) या सीता जयंती पर्व मनाया जाता है। महाराज जनक की पुत्री विवाह पूर्व महाशक्तिस्वरूपा थी। माता सीता का विवाह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के साथ हुआ था। विवाह पश्चात वे राजा दशरथ की संस्कारी बहू और वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम के कर्तव्यों का पूरी तरह पालन किया। 
 
माता सीता एक आदर्श पत्नी मानी जाती है। अपने दोनों पुत्रों लव-कुश को वाल्मीकि के आश्रम में अच्छे संस्कार देकर उन्हें तेजस्वी बनाया। इसीलिए माता सीता भगवान श्री राम की श्री शक्ति है। इसीलिए फाल्गुन कृष्ण अष्टमी का व्रत रखकर सुखद दांपत्य जीवन की कामना की जाती है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह व्रत बहुत महत्वपूर्ण है। यह व्रत एक आदर्श पत्नी और सीता जैसे गुण हमें भी प्राप्त हो इसी भाव के साथ रखा जाता है। शादी योग्य युवतियां भी यह व्रत कर सकती है, जिससे वह एक आदर्श पत्नी बन सकें। 
 
जानकी जयंती के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखकर माता सीता की पूजा करती हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है एवं श्री राम-सीता का विधिपूर्वक पूजन करता है, उसे सोलह महान दानों का फल, पृथ्वी दान तथा समस्त तीर्थों के दर्शन का फल प्राप्त होता है। 
 
जानकी जयंती पर कैसे करें पूजन-Janaki Jayanti  Festival    
 
* फाल्गुन कृष्ण अष्टमी तिथि के दिन सुबह नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नान के प‍श्चात माता सीता तथा भगवान श्री राम की पूजा करें।
 
* राम-सीता की प्रतिमा पर श्रृंगार की सामग्री चढ़ाएं।
 
* श्री राम को पीले और माता सीता को लाल वस्त्र पहनाएं। 
 
- इस दिन राम-सीता की संयुक्त रूप से पूजन करें। 
 
- तत्पश्चात आरती करें। 
 
- माता जानकी की जन्म कथा पढ़ें। 
 
- श्री राम तथा माता जानकी के मंत्रों का जाप करें। 
 
- दूध-गुड़ से बने व्यंजन बनाएं और दान करें।
 
- शाम को पूजा करने के बाद इसी व्यंजन से व्रत खोलें। 
 
मंत्र-Janaki Jayanti Mantra 
-'श्री सीतायै नम:' 
- ॐ जानकीवल्लभाय नमः 
- 'श्रीसीता-रामाय नम:' 
- श्रीरामचन्द्राय नम:।
- श्री रामाय नम:।
- श्री सीतायै नम:।
 
उपाय-Janaki Jayanti ke Upay
 
- अगर आपकी कोई खास मनोकामना पूर्ण नहीं हो रही हो तो जानकी जयंती या सीता अष्टमी के दिन रुद्राक्ष की माला से 'ॐ जानकी रामाभ्यां नमः' मंत्र का 1, 5, 11 या 21 मालाओं का जाप करें। 
 
- जानकी जयंती का व्रत रखने से सुहागिन महिलाओं के वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियां खत्म होती हैं।
 
- सीता जयंती पर राम-सीता के पूजन से पति की आयु लंबी होती है। 
 
- यदि किसी कन्या की शादी में अड़चनें आ रही हैं गंगा या तुलसी के पेड़ की मिट्टी लेकर राम-सीता की प्रतिमा बनाकर उसका पूजन करके सुहाग सामग्री चढ़ाकर अच्छे वर की प्रार्थना करें। 
 
- जानकी जयंती के दिन राम-सीता की एक तस्वीर घर के पूजा स्थान में लाकर रखें तथा उसका प्रतिदिन पूजन करें। इस उपाय से पति-पत्नी के बीच चल रहा कलह दूर होकर मधुर संबंध बनेंगे।  
 
- जानकी जयंती के दिन सीता-राम जी का एक साथ पूजन करके माता सीता की मांग में 7 बार सिंदूर लगाएं और वहीं सिंदूर हर बार अपनी मांग में लगाएं, इससे वैवाहिक जीवन सुखमय हो जाता है। 

श्री सीता चालीसा
 
।। दोहा।।
 
बन्दौ चरण सरोज निज जनक लली सुख धाम,
राम प्रिय किरपा करें सुमिरौं आठों धाम।।
 
कीरति गाथा जो पढ़ें सुधरैं सगरे काम,
मन मन्दिर बासा करें दुःख भंजन सिया राम।।
 
।। चौपाई।।
 
राम प्रिया रघुपति रघुराई, बैदेही की कीरत गाई।।
चरण कमल बन्दों सिर नाई, सिय सुरसरि सब पाप नसाई।।
जनक दुलारी राघव प्यारी, भरत लखन शत्रुहन वारी।।
दिव्या धरा सों उपजी सीता, मिथिलेश्वर भयो नेह अतीता।।
 
सिया रूप भायो मनवा अति, रच्यो स्वयंवर जनक महीपति।।
भारी शिव धनु खींचै जोई, सिय जयमाल साजिहैं सोई।।
भूपति नरपति रावण संगा, नाहिं करि सके शिव धनु भंगा।।
जनक निराश भए लखि कारन, जनम्यो नाहिं अवनिमोहि तारन।।
 
यह सुन विश्वामित्र मुस्काए, राम लखन मुनि सीस नवाए।।
आज्ञा पाई उठे रघुराई, इष्ट देव गुरु हियहिं मनाई।।
जनक सुता गौरी सिर नावा, राम रूप उनके हिय भावा।।
मारत पलक राम कर धनु लै, खंड खंड करि पटकिन भू पै।।
 
जय-जयकार हुई अति भारी, आनन्दित भए सबैं नर नारी।।
सिय चली जयमाल सम्हाले, मुदित होय ग्रीवा में डाले।।
मंगल बाज बजे चहुँ ओरा, परे राम संग सिया के फेरा।।
लौटी बारात अवधपुर आई, तीनों मातु करैं नोराई।।
 
कैकेई कनक भवन सिय दीन्हा, मातु सुमित्रा गोदहि लीन्हा।।
कौशल्या सूत भेंट दियो सिय, हरख अपार हुए सीता हिय।।
सब विधि बांटी बधाई, राजतिलक कई युक्ति सुनाई।।
मंद मती मंथरा अडाइन, राम न भरत राजपद पाइन।।
 
कैकेई कोप भवन मा गइली, वचन पति सों अपनेई गहिली।।
चौदह बरस कोप बनवासा, भरत राजपद देहि दिलासा।।
आज्ञा मानि चले रघुराई, संग जानकी लक्षमन भाई।।
सिय श्रीराम पथ पथ भटकैं, मृग मारीचि देखि मन अटकै।।
 
राम गए माया मृग मारन, रावण साधु बन्यो सिय कारन।।
भिक्षा कै मिस लै सिय भाग्यो, लंका जाई डरावन लाग्यो।।
राम वियोग सों सिय अकुलानी, रावण सों कही कर्कश बानी।।
हनुमान प्रभु लाए अंगूठी, सिय चूड़ामणि दिहिन अनूठी।।
 
अष्ठसिद्धि नवनिधि वर पावा, महावीर सिय शीश नवावा।।
सेतु बांधी प्रभु लंका जीती, भक्त विभीषण सों करि प्रीती।।
चढ़ि विमान सिय रघुपति आए, भरत भ्रात प्रभु चरण सुहाए।।
अवध नरेश पाई राघव से, सिय महारानी देखि हिय हुलसे।।
 
रजक बोल सुनी सिय बन भेजी, लखनलाल प्रभु बात सहेजी।।
बाल्मीक मुनि आश्रय दीन्यो, लवकुश जन्म वहां पै लीन्हो।।
विविध भांती गुण शिक्षा दीन्हीं, दोनुह रामचरित रट लीन्ही।।
लरिकल कै सुनि सुमधुर बानी, रामसिया सुत दुई पहिचानी।।
 
भूलमानि सिय वापस लाए, राम जानकी सबहि सुहाए।।
सती प्रमाणिकता केहि कारन, बसुंधरा सिय के हिय धारन।।
अवनि सुता अवनी मां सोई, राम जानकी यही विधि खोई।।
पतिव्रता मर्यादित माता, सीता सती नवावों माथा।।
 
।। दोहा।।
 
जनकसुता अवनिधिया राम प्रिया लवमात,
चरणकमल जेहि उन बसै सीता सुमिरै प्रात।।
 

Janaki Jayanti

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