Hanuman Chalisa

हरियाली अमावस्या 2019 : बन रहे हैं अत्यंत दुर्लभ शुभ संयोग, जान कर चकित रह जाएंगे आप

Updated: मंगलवार, 30 जुलाई 2019 (14:03 IST)
भारत के पर्यावरण दिवस यानी हरियाली अमावस्या पर इस बार गुरुपुष्य नक्षत्र के साथ अमृतसिद्धि व सर्वार्थसिद्धि योग का विलक्षण संयोग बन रहा है। सालों बाद दिव्य संयोग में आने वाली अमावस्या पर पितृ कर्म व पौधारोपण करना श्रेष्ठ रहेगा। इस बार हरियाली अमावस्या पर 6 घंटे तक पुष्य नक्षत्र का योग रहेगा।
 
पंचागीय गणना के अनुसार हरियाली अमावस्या 1 अगस्त को पुष्य नक्षत्र, सिद्धि योग, नागकरण व कर्क राशि के चंद्रमा के संयोग में मनाई जाएगी। गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का होना अमृतसिद्धि व सर्वार्थसिद्धि योग का निर्माण करता है। क्योंकि पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि तथा उप स्वामी बृहस्पति हैं। सिद्धि योग के स्वामी भगवान श्री गणेश हैं। इस प्रकार के संयोग में अमावस्या पर तंत्र व मंत्र की सिद्धि विशेष फल प्रदान करती है। पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए भी यह दिन खास है। इस दिन तीर्थ पर पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि तथा वंशवृद्धि होती है। 
 
हरियाली अमावस्या वास्तव में प्रकृति की उपासना का पर्व है। इस दिन वृक्षों का पूजन तथा पौधारोपण की मान्यता है। इस दिन घरों में भी हरियाली का पूजन किया जाता है। वनस्पति तंत्र के अनुसार अमृतसिद्धि योग में पौध रोपण करने से विशिष्ट फल की प्राप्ति होती है। संयोग से इस बार हरियाली अमावस्या पर अमृतसिद्धि योग का संयोग है। ऐसे में इस दिन पितरों की निमित्त वृक्षारोपण करना शुभफलदायी है।
 
जलवायु व मौसम के कारक ग्रह बुध अमावस्या पर सुबह 9.42 बजे मार्गीय हो रहे हैं। बुध के मार्गीय होते ही वर्षा ऋतु के चक्र में अचानक परिवर्तन आएगा। इसका प्रभाव भी दिखाई देगा। वहीं गुरु का वृश्चिक राशि में वक्रगत दृष्टि से कर्क राशि स्थित सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध व शुक्र से नवम-पंचम दृष्टि संबंध बनेगा। इसका प्रभाव जलीय ऋतु चक्र के सकारात्मक पक्ष को प्रबल करेगा।

ALSO READ: हरियाली अमावस्या, 1 अगस्त 2019 : क्या होगा राशियों पर असर, जानिए उपाय भी

ALSO READ: हरियाली अमावस्या 2019 : कब और क्यों मनाया जाता है यह पर्व, जानिए महत्व

Show comments

सभी देखें

गुप्त नवरात्रि में ये मंत्र जप लिया तो तुरंत ही दूर होंगे संकट और माता का मिलेगा आशीर्वाद

गुंडिचा मंदिर क्यों है जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव? जानिए 5 खास बातें

भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं? जानिए रथयात्रा से जुड़ी यह रोचक परंपरा

गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक की सही व्याख्या क्या है? मौलाना जरजिस अंसारी के दावे की पड़ताल

पुरी के जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास: कब, कैसे और क्यों हुई शुरुआत?

सभी देखें

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

Ashadha Purnima 2026: आषाढ़ी पूर्णिमा कब है, जानिए इस दिन का खास महत्व

Devshayani Ekadashi 2026: कब है देवशयनी एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पारण का सही समय

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश, 5 राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन; धन-करियर में मिल सकता है बड़ा लाभ

Vijaya Parvati Vrat 2026: विजया पार्वती व्रत कब से होगा प्रारंभ, क्या है इस व्रत का महत्व

अगला लेख