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गणगौर : मां पार्वती के श्रृंगार और पूजन का पर्व...

Updated: बुधवार, 30 मार्च 2016 (16:38 IST)
‍गणगौर तीज का व्रत चैत्र माह, शुक्ल पक्ष तृ‍तीया (3) के दिन किया जाता है। इसके 16 दिन पहले दो दूनों या सकोरों में गेहूं के जवारे बोए जाते हैं। प्रतिदिन इनको सींचा जाता है। कन्याएं अच्‍छे वर की प्राप्ति के लिए व्रत करती हैं।


 

कन्याएं होली जलने के बाद से ही प्रात: सज-धजकर लोटे लेकर बाग-बगीचे में जाती हैं। वहां से फूल, दूब और पत्ते तोड़ती हैं तथा लोटों में पानी भरकर इन्हें सजाती हैं। सिर पर रखकर वहां से गीत गाती हुई वहां पर लाती हैं जिस घर गणगौर मांडी जाती है।

सामूहिक रूप से ‍गणगौर पूजन :- 
 
सामूहिक रूप से सभी लड़कियां गणगौर की प्रतिदिन पूजा करती हैं तथा लाए हुए पोया-पाती चढ़ाती हैं। इस प्रकार कन्याएं 17  दिनों तक पूजन करती हैं। गणगौर की तीज के दिन वे उल्लासपूर्वक विधि अनुसार पूर्ण रूप से पूजन करती हैं, आरती करती हैं एवं भोग लगाकर प्रसाद वितरण करती हैं। 
 
जिस घर पर गणगौर की सामूहिक रूप से पूजन करते हैं, वहां मिट्टी गूंथ कर ईसर, पार्वती, इलखी, बिल्खी, लड्डू, पेड़ा बनाकर गोबर से लीपकर तथा नेजे (पाण्डु) से पोतकर गुलाबी रंग से उसे सजाया जाता है। वस्त्र एवं आभूषण से सुंदर श्रृंगार किया जाता है। इन सबको मिट्टी से बनाए गए सिंहासन में बिठाकर पूजन के स्थान पर रखते हैं। 



 
गणगौर तीज : गुने, दूब और श्रृंगार का पर्व :- 
 
महिलाएं गणगौर की तीज के पहले सिर धोती हैं, मेंहदी लगाती हैं, मीठे तथा बेसन के नमकीन गुने (अपनी रीति अनुसार) बनाती हैं। तीज के दिन बेसन में हल्दी मिलाकर पार्वतीजी को चढ़ाने के लिए सिर से पैर तक के गहने बनाकर चढ़ाती हैं। ‍

महिलाएं श्रृंगार करके पूजन की थाली को विधिवत सामग्री से सजाती हैं। दो दूनों में 8-8 नमकीन गुने रखें। 16-16 दूबों के 2 गुच्छों (पोया) बनाकर रखें। अपनी-अपनी रीति के अनुसार अन्य सामग्री भी लेकर माता पार्वती का पूजन करती है। 


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गणगौर पूजन : 
 

 
* घी का दीपक जलाएं, अगरबत्ती लगाएं। 
 
* पान पर कंकू-रोली से स्वास्तिक (सातिया) बनाएं, उस पर रुपए रखकर, गोल सुपारी पर आंटी (रंगीन नाड़ा) लपेटकर गणेश स्थापना करें। 
 
* प्रथम गणेशजी की पूजा करें। तत्पश्चात ईसर-पार्वती, इल्खी, बिल्खी, ज्वारे की वि‍धिवत पूजन करें। वस्त्र चढ़ाएं, बनाए गए बेसन के गहनों को चढ़ाएं, एक दूना गुने का चढ़ा दें। 
 
* दूसरे दूने को 16 बारईसर-पार्वती पर वारें तथा इस दोने में रखे गुनों को दूसरी महिला के गुनों से बदल लें। ये बदले हुए गुने भोजन करते समय पहले आपको ही खाना है। 
 
* 16-16 दूब के बनाए गए गुच्छे (पोया) अपने दोनों हाथों में रखकर जल में डुबोकर ईसर-पार्वतीजी के सामने उनको आपस में टकराते हुए लगातार यह गति गाती जावें। 

 
* गणगौर का गीत 
 
गौर-2 गोमती, ईसर पूजे पार्वती,
पार्वती के आला तीला, सोने का टीला।
टीला के टमका दे, बारह रानी बरत करे,
करते-2 आस आयो, मास आयो, छटे चौमास आयो।
खेड़े खाण्डे लाडू लायो, लाडू बीराएं दियो,
बीरो गुटकायगो, चूनड़ उडायगो,
चूनड़ म्हारी अब छब, बीरों म्हारो अमर।
साड़ी में सिंगोड़ा, बाड़ी में बिजोरा,
रानियां पूजे राज में, मैं म्हाका सुहाग में।
सुहाग भाग कीड़ीएं, कीड़ी थारी जात है, जात पड़े गुजरात है।
गुजरात में पानी आयो, दे दे खुंटियां तानी आयो, आख्यां फूल-कमल की डोरी।।
(इस गीत को 16 बार गाती जावें।) 
 
* गीत पूरा होने पर यह दूब वहां चढ़ा दें तथा आरती करें।

* गणगौर की उद्यापन विधि : - 
 
गणगौर तीज के दिन 16 महिलाओं को भोजन कराया जाता है। यदि इतनी शक्ति न हो तो उनको दूने या कटोरी में 8 मीठे और 8 नमकीन गुनों के साथ रुपया, टीकी पत्ता, मेहंदी, आंटी रखकर घर पर ही पहुंचा दें। 
 
पूजन विधि अनुसार ही करें। ईसर-पार्वती (गणगौर) को पूरा सरोपाव (वस्त्र, चूड़ा, बिछिया, टीकी, मेहंदी, आंटी) चढ़ाएं। 



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