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देवउठनी एकादशी : पर्व से जुड़ी 10 विशेष बातें

Updated: बुधवार, 9 नवंबर 2016 (15:30 IST)
10 नवंबर और 11 नवंबर को मतांतर से देव उठनी एकादशी है। देव प्रबोधिनी एकादशी का महत्व शास्त्रों में उल्लेखित है। क्या करना शुभ होगा इस दिन, पढ़ें 10 विशेष बातें : 
* क्षीरसागर में शयन कर रहे श्री हरि विष्णु को जगाकर उनसे मांगलिक कार्यों की शुरूआत कराने की प्रार्थना की जाएगी। 
 
* देवउठनी ग्यारस पर मंदिरों व घरों में भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा-अर्चना की जाएगी। 
 
* मंडप में शालिग्राम की प्रतिमा एवं तुलसी का पौधा रखकर उनका विवाह कराया जाएगा। 
 
* मंदिरों के व घरों में गन्नों के मंडप बनाकर श्रद्धालु भगवान लक्ष्मीनारायण का पूजन कर उन्हें बेर,चने की भाजी, आंवला सहित अन्य मौसमी फल व सब्जियों के साथ पकवान का भोग अर्पित करेंगे।
 
* इसके बाद मण्डप की परिक्रमा करते हुए भगवान से कुंवारों के विवाह कराने और विवाहितों के गौना कराने की प्रार्थना की जाएगी। 
 
* प्रबोधिनी एकादशी के दिन शालिग्राम, तुलसी व शंख का पूजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
 
* गोधूलि बेला में तुलसी विवाह करने का पुण्य लिया जाता है। 
 
* दीप मालिकाओं से घरों को रोशन किया जाएगा और बच्चे पटाखे चलाकर खुशियां मनाएंगे।
 
* तुलसी की परिक्रमा करना शुभ होता है। 
 
* इस दिन घर में रंगोली अवश्य बनाएं, इससे नकारात्मक शक्तियां दूर होती है। 


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