Hanuman Chalisa

19 अगस्त को बहुला चतुर्थी व्रत, देता है ऐश्वर्य और संतान का वरदान, जानिए कैसे करें पूजन

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को बहुला गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन बहुला चतुर्थी व्रत किया जाता है। इसे संकटनाशक चतुर्थी माना गया है। वर्ष 2019 में बहुला चौथ व्रत सोमवार, 19 अगस्त को मनाया जाएगा। इसी दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी होने के कारण यह व्रत अधिक महत्व का होगा। बहुला चतुर्थी व्रत में गौ-पूजन को बहुत महत्व दिया गया है।
 
बहुला चौथ की पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन माताएं कुम्हारों द्वारा मिट्टी से भगवान शिव-पार्वती, कार्तिकेय-श्रीगणेश तथा गाय की प्रतिमा बनवा कर मंत्रोच्चारण तथा विधि-विधान के साथ इसे स्थापित करके पूजा-अर्चना करने की मान्यता है। ऐसा माना जाता है कि इस तरह के पूजन से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती हैं।
 
बहुला चतुर्थी (चौथ) तिथि को भगवान श्री कृष्ण ने गौ-पूजा के दिन के रूप में मान्यता प्रदान की है। अत: इस दिन श्री कृष्‍ण भगवान का गौ माता का पूजन भी किया जाता है।
 
आइए जानें, कैसे करें बहुला चौथ का व्रत -
 
* बहुला चतुर्थी व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।
 
* इस चतुर्थी को आम बोलचाल की भाषा में बहुला चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।
 
* इस दिन चाय, कॉफी या दूध नहीं पीना चाहिए, क्योंकि यह दिन गौ-पूजन का होने से दूधयुक्त पेय पदार्थों को खाने-पीने से पाप लगता है। इस संबंध में यह मान्यता है कि इस दिन गाय का दूध एवं उससे बनी हुई चीजों को नहीं खाना चाहिए।
 
* जो व्यक्ति चतुर्थी को दिनभर व्रत रखकर शाम (संध्या) के समय भगवान श्री कृष्‍ण, शिव परिवार तथा गाय-बछड़े की पूजा करता है उसे अपार धन तथा सभी तरह के ऐश्वर्य और संतान की चाह रखने वालों को संतान सुख की प्राप्ति होती है।
 
* बहुला व्रत माताओं द्वारा अपने पुत्र की लंबी आयु की कामना के लिए रखा जाता है।
 
* इस व्रत को करने से शुभ फल प्राप्त होता है, घर-परिवार में सुख-शांति आती है एवं मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
 
* यह व्रत करने से परिवार और संतान पर आ रहे विघ्न संकट तथा सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।

* इतना ही नहीं यह व्रत जन्म-मरण की योनि से मुक्ति भी दिलाता है।
 
इसके पीछे एक यह लोककथा भी प्रचलित है कि एक बार बहुला नामक गाय जंगल में चरते-चरते काफी दूर जा पहुंची, जहां एक शेर उसे खाने के लिए रोक लेता है। तब बहुला गाय द्वारा अपने भूखे बछड़े को दूध पिलाकर वापस आने की शेर से विनती करने पर शेर उसे छोड़ देता है। तब शेर द्वारा बहुला गाय को छोड़ने पर उसे शेर योनि से मुक्ति मिल जाती है तथा वह अपने पूर्व रूप अर्थात गंधर्व रूप में प्रकट होता है। इसीलिए इस दिन महिलाओं द्वारा दिनभर उपवास रखकर शिव परिवार की पूजा के साथ बहुला नामक गाय की पूजा भी की जाती है।
 
- आरके. 

ALSO READ: बहुला चतुर्थी के दिन अवश्य पढ़ें यह प्रचलित कथा
 

Show comments

सभी देखें

शुक्र का सिंह राशि में गोचर, इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जरूर करें ये 3 उपाय

अमरनाथ यात्रा 2026: निकलने से पहले जरूर कर लें ये 5 जरूरी तैयारियां, तभी रहेगा सफर सुरक्षित

Vakri Budh Effect: बुध की कर्क राशि में वक्री चाल, इन 3 राशियों को रहना होगा बेहद सतर्क

क्या धरती से टकराएगा विशालकाय उल्कापिंड? जानें कब सच हो सकती है यह भविष्यवाणी

राहु-गुरु का षडाष्टक योग बना, जानें 12 राशियों पर कैसा पड़ेगा असर

सभी देखें

Yogini Ekadashi 2026: योगिनी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा?

बृहस्पति का सिंह राशि में गोचर: करियर, धन और परिवार पर कैसा पड़ेगा असर? जानें 12 राशियों का राशिफल

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (03 जुलाई, 2026)

03 July Birthday: आपको 3 जुलाई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 3 जुलाई 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

अगला लेख