dipawali
✕

मार्गशीर्ष मास की संकष्टी गणेश चतुर्थी आज, पढ़ें कथा

Updated: गुरुवार, 30 नवंबर 2023 (09:16 IST)
ganadhipa sankashti chaturthi 2023: इस बार अगहन महीने की संकष्टी चतुर्थी व्रत 30 नवंबर 2023, गुरुवार को रखा जा रहा है। इस दिन को गणाधिप चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। भगवान श्री गणेश को समर्पित यह चतुर्थी बहुत खास मानी गई है। आइए यहां पढ़ें इसकी कथा- 
 
Margashirsha Chaturthi Katha : संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा 
 
प्राचीन काल में त्रेतायुग में दशरथ नामक एक प्रतापी राजा थे। वे राजा आखेट प्रिय थे। एक बार अनजाने में ही उन्होंने एक श्रवणकुमार नामक ब्राह्मण का आखेट में वध कर दिया। उस ब्राह्मण के अंधे मां-बाप ने राजा को शाप दिया कि जिस प्रकार हम लोग पुत्रशोक में मर रहे हैं, उसी भांति तुम्हारा भी पुत्रशोक में मरण होगा। 
 
इससे राजा को बहुत चिंता हुई। उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। फलस्वरूप जगदीश्वर ने राम रूप में अवतार लिया। भगवती लक्ष्मी जानकी के रूप में अवतरित हुई। पिता की आज्ञा पाकर भगवान राम, सीता और लक्ष्मण सहित वन को गए, जहां उन्होंने खर-दूषण आदि अनेक राक्षस व राक्षसियों का वध किया। इससे क्रोधित होकर रावण ने सीता जी का अपहरण कर लिया। 
 
सीता जी की खोज में भगवान राम ने पंचवटी का त्याग कर दिया और ऋष्यमूक पर्वत पर पहुंचकर सुग्रीव के साथ मैत्री की। तत्पश्चात सीता जी की खोज में हनुमान आदि वानर तत्पर हुए। ढूंढते-ढूंढते वानरों ने गिद्धराज संपाती को देखा। इन वानरों को देखकर संपाती ने पूछा कि कौन हो? इस वन में कैसे आए हो? तुम्हें किसने भेजा है? यहां पर तुम्हारा आना किस प्रकार हुआ है।
 
संपाती की बात सुनकर वानरों ने उत्तर दिया कि भगवान विष्णु के अवतार दशरथ नंदन राम जी, सीता और लक्ष्मण जी के साथ दंडकवन में आए हैं। वहां पर उनकी पत्नी सीता जी का अपरहण कर लिया गया है। हे मित्र! इस बात को हम लोग नहीं जानते कि सीता कहां है?
 
उनकी बात सुनकर संपाती ने कहा कि तुम सब रामचंद्र के सेवक होने के नाते हमारे मित्र हो। जानकी जी का जिसने हरण किया है और वह जिस स्थान पर है वह मुझे मालूम है। सीता जी के लिए मेरा छोटा भाई जटायु अपने प्राण गंवा चुका है। यहां से थोड़ी ही दूर पर समुद्र है और समुद्र के उस पार राक्षस नगरी है। वहां अशोक के पेड़ के नीचे सीता जी बैठी हुई है। 
 
रावण द्वारा अपह्रत सीता जी अभी भी मुझे दिखाई दे रही हैं। मैं आपसे सत्य कह रहा हूं कि सभी वानरों में हनुमान जी अत्यंत पराक्रमशाली है। अतः उन्हें वहां जाना चाहिए। केवल हनुमान जी ही अपने पराक्रम से समुद्र लांघ सकते हैं। अन्य कोई भी इस कार्य में समर्थ नहीं है।
 
संपाती की बात सुनकर हनुमान जी ने पूछा कि हे संपाती! इस विशाल समुद्र को मैं किस प्रकार पार कर सकता हूं? जब हमारे सब वानर उस पार जाने में असमर्थ हैं तो मैं ही अकेला कैसे पार जा सकता हूं? 
 
हनुमान जी की बात सुनकर संपाती ने उत्तर दिया कि हे मित्र, आप संकटनाशक गणेश चतुर्थी का व्रत कीजिए। उस व्रत के प्रभाव से आप समुद्र को क्षणभर में पार कर लेंगे। संपाती के आदेश से संकट चतुर्थी के उत्तम व्रत को हनुमान जी ने किया।

हे देवी, इसके प्रभाव से हनुमान जी क्षणभर में समुद्र को लांघ गए। इस लोक में इसके सामान सुखदायक कोई दूसरा व्रत नहीं हैं। अत: मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्थी के दिन यह व्रत करने से सभी संकट दूर होते हैं तथा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।

ALSO READ: मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी का क्या है महत्व?

ALSO READ: मार्गशीर्ष माह के हिंदू व्रत और त्योहार लिस्ट

Show comments

सभी देखें

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 06 नवंबर 2026: शुक्रवार का पंचांग और शुभ समय

Narak Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी पर कब करें पूजा और अभ्यंग स्नान? जानें सटीक शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री, विधि और कथा

Diwali 2026: दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का सबसे सटीक शुभ मुहूर्त, नोट करें संपूर्ण पूजन विधि, सामग्री और कथा

नरक चतुर्दशी पर इस मुहूर्त में करें हनुमान पूजा, सभी संकट हो जाएंगे दूर, नरक के भय से मिलेगी मुक्ति

Diwali 2026: दिवाली की रात भूलकर भी न करें ये 5 तांत्रिक प्रयोग, हो सकता है भारी नुकसान

सभी देखें

Diwali 2026: दिवाली की रात चुपचाप कर लें ये 5 गुप्त प्रयोग, साल भर होगी अपार धन की वर्षा

धनतेरस पर आरोग्य की पूजा करें, अपने डॉक्टर को धन्यवाद दें

Dhanteras 2026: धनतेरस पर इस सरल विधि से करें भगवान धन्वंतरि की पूजा, नोट करें सटीक शुभ मुहूर्त और सामग्री

मंगल गोचर 2026: सिंह राशि में आ रहे हैं ग्रहों के सेनापति, इन 5 राशियों पर बरसेगी विशेष कृपा

धनतेरस पर इन चीजों की है सबसे ज्यादा मांग, बर्तन-सोने के साथ छाए ये नए ट्रेंड्स, जानें क्या खरीद रहे हैं लोग?

अगला लेख