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जानकी जयंती पर ऐसे करें माता स‍ीता का पूजन...

Updated: मंगलवार, 2 मई 2017 (12:44 IST)
* जानकी नवमी : माता सीता का प्राकट्‍य दिवस 
 
* वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को सीता नवमी (जानकी जयंती) कहते हैं। 
 
*  धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी दिन माता सीता का प्राकट्य हुआ था। 
 
*  पौराणिक शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को पुष्य नक्षत्र के मध्याह्न काल में जब महाराजा जनक संतान प्राप्ति की कामना से यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए हल से भूमि जोत रहे थे, उसी समय पृथ्वी से एक बालिका का प्राकट्य हुआ।

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*  जोती हुई भूमि तथा हल के नोक को भी 'सीता' कहा जाता है, इसलिए बालिका का नाम 'सीता' रखा गया था। अत: इस पर्व को 'जानकी नवमी' भी कहते हैं। 
 
* इस दिन माता सीता के मंगलमय नाम 'श्री सीतायै नमः' और 'श्रीसीता-रामाय नमः' का उच्चारण करना लाभदायी रहता है। 
 
* इस व्रत को विवाहित स्त्रियां अपने पति की आयु के लिए करती हैं। 
 
* मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है एवं राम-सीता का विधि-विधान से पूजन करता है, उसे 16 महान दानों का फल, पृथ्वी दान का फल तथा समस्त तीर्थों के दर्शन का फल मिल जाता है। 
 
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