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ब्रिटेन के नए वीजा नियमों से भारतीय छात्र प्रभावित

गुरुवार, 24 नवंबर 2016 (17:15 IST)
नई दिल्ली। ब्रिटेन के नए वीजा नियमों से भारतीय छात्रों में गुस्सा और निराशा दोनों ही हैं, क्योंकि  इससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। विदित हो कि वर्ष 2015 और 2016 के दौरान दस हजार से कुछ अधिक छात्रों को भी वीजा दिया गया है।
ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय छात्रों के स्रोत बाजार के तौर पर भारतीय छात्र तीसरा बड़ा वर्ग है, लेकिन नए कड़े वीजा नियमों के चलते छात्रों के लिए अध्ययन के अवसर कम होते जा रहे हैं। ब्रिटेन द्वारा भारतीय छात्रों के लिए वीजा पर अस्थायी रोक लगाने के निर्णय से सैकड़ों छात्रों का भविष्य और पैसा दांव पर लग गया है। इनके शिक्षण शुल्क की वापसी की संभावना बहुत कम है। इससे इन्हें लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ेगा। 
 
नवंबर में घोषित नए वीजा नियमों के अनुसार ब्रिटेन के गृह मंत्रालय कार्यालय की ओर से घोषणा की गई है कि जिन आवेदकों द्वारा 24 नवंबर के बाद टियर-2 इंट्रा कंपनी ट्रांसफर (आईसीटी) वर्ग के अंतर्गत आवेदन किए जाएंगे, उन्हें अधिक ऊंची सैलरी की सीमा रेखा के अंतर्गत आवेदन करना होगा जिसके लिए उन्हें 30 हजार पौंड की फीस चुकानी होगी। विदित हो कि पहले यह राशि केवल 20,800 पौंड थी।   
 
ब्रिटिश उपउच्चायुक्त निजेल कैसी ने कहा कि प्रवेश प्रक्रिया कॉलेज और छात्र के बीच का मामला है। हम इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकते। हालांकि हमें उम्मीद है कि कॉलेज इन हालातों को समझेंगे लेकिन हम इसमें कोई भूमिका अदा नहीं कर सकते। चंडीगढ़, जालंधर और नई दिल्ली केंद्रों पर अक्टूबर से दिसंबर 2009 के बीच वीजा आवेदनों की संख्या में दस गुना वृद्धि दर्ज की गई। इसे देखते हुए सोमवार से इस पर अस्थायी निलंबन की प्रक्रिया को लागू कर दी गई। 
 
पिछले साल इन केंद्रों पर इस अवधि में 13,500 आवेदन पत्र आए थे, जबकि 2008 और 2007 में यह संख्या क्रमश: 1,800 और 1,200 थी। कैसी ने बताया कि इस माह के अंत तक हम स्थिति की समीक्षा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुछ एजेंट छात्रों को वीजा के माध्यम से स्थायी आवास का झांसा देते हैं, जो कि पूरी तरह गलत है। 
 
आधिकारिक दस्तावेजों से पता चलता है कि ब्रिटेन के लिए सबसे ज्यादा वीजा आवेदन भारत से होता है। एक छात्र हेमंत मुद्गल ने कहा कि मैंने मार्च 2009 में लंदन के एक कॉलेज में प्रवेश लिया। मुझे प्रस्ताव पत्र दिया गया और मैंने शिक्षण शुल्क भी जमा किया। अब इस निर्णय से मुझे वीजा मिल पाने की उम्मीद बहुत कम है। 
 
एक दूसरे छात्र मनीष शर्मा बताते हैं, मुझे 15 फरवरी को वीजा के लिए साक्षात्कार हेतु बुलाया गया था। इस घोषणा से लगता है कि अब मुझे समय से वीजा नहीं मिल पाएगा। अब मेरा पैसा कॉलेज में फंस गया है। अगर मैं इसकी वापसी के लिए आवेदन करता हूं, तो कॉलेज के नियमों के मुताबिक मुझे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
 
द क्विंट की खबर के मुताबिक पोस्ट-स्टडी स्टे पॉलिसी भी कड़ी बना दी गई है जिसके चलते बहुत से संभावित छात्र हतोत्साहित होंगे। सारी देश से छात्रों ने अपनी हालत को बताया और कहा कि नए नियमों से उन पर विपरीत असर पड़ेगा। 
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