dharma sangrah

प्रवासी कविता : छोटी सी कश्ती...

Updated: शनिवार, 1 जुलाई 2017 (14:43 IST)
न उलझ जाऊं इस जहां के आडंबरों में, जब हो कभी मन की चंचलता,
न कर बैठूं कोई अपराध जब मन की हो अधीरता।
 
न जाऊं आड़े-टेढ़े रास्तों पर मैं ओ मेरी किस्मत के बनाने वाले,
बस विनती तुझसे है इतनी, चले आना आके तू सब संभाले। 
 
न छद्मवेशी इस दुनिया का छद्म एहसास और,
न कभी खोना चाहूं उन छद्म एहसासों की सांसों में।
 
न पाए जिंदगी के ये झरोखे किसी ऐसे एहसास को जिनमें,
न सच का साथ और न कोई विश्वास हो। 
 
न घिर जाऊं कभी आकर्षणों के भरम में, 
न जगे प्यास कभी उस चकाचौंध के रमण में।
 
न कर बैठूं गुनाह कोई लोभ में,
न दिल दुखे किसी का किसी मोह में,
न चाह हो धन पराया हड़पने की।
 
हे ईश्वर! गर भटक भी जाऊं राहें, मंजिलें मैं अपनी 
आकर संभाल लेना ये छोटी सी कश्ती मेरी।
लेखक के बारे में
पुष्पा परजिया
Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

इंदौर में आयोजित होगा राज्य स्तरीय- लक्ष्य मंथन योगासन प्रतियोगिता

दिलों को जोड़ने की एक मुहिम: जानिए राजीव गांधी की जयंती और 'सद्भावना दिवस' का कनेक्शन

आसमान से बरसेगा सेहत या संकट? जानिए बारिश का पानी पीने का सच!

Ebola Virus: क्या है इबोला वायरस? जानिए इसके लक्षण, संक्रमण और बचाव के आसान उपाय

बड़बोले ट्रंप की घटिया बेशर्मी, अंकारा में नहीं था Trump को कोई खतरा

अगला लेख