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नार्वे में मंडेला और गोपालदास नीरज जी याद किए गए

Updated: सोमवार, 6 अगस्त 2018 (15:39 IST)
ओस्लो, नार्वे में नेलसन मंडेला की जन्मशती पर और गोपालदास नीरज जी की मृत्यु पर याद किए गए और श्रद्धांजलि दी गई। दायकमान्स्के पुस्तकालय तोइयेन और वाइतवेत सेन्टर में लेखकों ने नीरज और मंडेला को याद किया और उनके संस्मरण साझा किए। 
 
भारतीय-नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम द्वारा आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक' ने दोनों महान आत्माओं पर अपने संस्मरण सुनाए जिनसे वह स्वयं मिल चुके हैं। उन्होंने कहा कि नीरज की गीतों की पुस्तकों को नार्वे के पुस्तकालय में होना चाहिए। 
 
इंगेर मारिये लिल्लेएंगेन, माया भारती, सत्यरूपा, राज कुमार, फैसल नवाज चौधरी ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर भारत से आए डॉ. पी. द्विवेदी जी ने नीरज को सर्वश्रेष्ठ गीतकार बताया और फ़िल्मी गीतों का जिक्र किया।
 
भारतीय-नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम के तत्वावधान में लेखक गोष्ठी का आयोजन हुआ । 
कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे, ए भाई ज़रा देखकर चलो आदि गीत हमेशा याद किए जाएंगे। वह मानवतावादी रचनाकार थे। 
  
- सुरेशचन्द्र शुक्ल 'शरद आलोक'

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