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Last Updated : शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022 (19:07 IST)

चैत्र नवरात्रि क्यों मनाई जाती है, कारण जानकर हैरान रह जाएंगे

चैत्र नवरात्रि क्यों मनाई जाती है, कारण जानकर हैरान रह जाएंगे | Chaitra Navratri
Why is Chaitra Navratri celebrated : 2 अप्रैल 2022 शनिवार से चैत्र नवरात्रि का पर्व प्रारंभ हो रहा है। इस पर्व में खासकर व्रत और साधना करके शक्ति संचय करने का महत्व रहता है। इसी दिन से हिन्दू नववर्ष नव संवत्सर यानी गुड़ी पड़वा का प्रथम दिन भी होता है। आओ जानते हैं कि चैत्र नवरात्रि मनाने का क्या है कारण।
 
 
चैत्र नवरात्रि मनाने का कारण क्या है (Chaitra navratri kyon manate hain) :

रम्भासुर का पुत्र था महिषासुर, जो अत्यंत शक्तिशाली था। उसने कठिन तप किया था। ब्रह्माजी ने प्रकट होकर कहा- 'वत्स! एक मृत्यु को छोड़कर, सबकुछ मांगों। महिषासुर ने बहुत सोचा और फिर कहा- 'ठीक है प्रभो। देवता, असुर और मानव किसी से मेरी मृत्यु न हो। किसी स्त्री के हाथ से मेरी मृत्यु निश्चित करने की कृपा करें।' ब्रह्माजी 'एवमस्तु' कहकर अपने लोक चले गए। वर प्राप्त करने के बाद उसने तीनों लोकों पर अपना अधिकार जमा कर त्रिलोकाधिपति बन गया। सभी देवता उससे परेशान हो गए।
 
 
तब सभी देवताओं ने आदिशक्त जगनंबा (अंबा) का आह्‍वान किया और तब देवताओं की प्रार्थना सुनकर मातारानी ने चैत्र नवरात्रि के दिन अपने अंश से 9 रूपों को प्रकट किया। इन 9 रूपों को देवताओं ने अपने-अपने शस्त्र देकर महिषासुर को वध करने का निवेदन किया। शस्त्र धारण करके माता शक्ति संपन्न हो गई। कहते हैं कि नौ रूपों को प्रकट करने का क्रम चैत्र माह की शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तक चला। इसीलिए इन 9 दिनों को चैत्र नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।
chaitra navratri muhurat 2022
 
शारदीय नवरात्रि क्यों मनाते हैं, जानिए कारण (Shardiya navratri manane ka karan bataiye):
 
देवी दुर्गा ने जब अपने 9 रूप प्रकट किए तो उन्होंने आश्‍विन माह की प्रतिपदा के दिन महिषासुर पर आक्रममण कर दिया और महिषासुर के साथ माता का 9 दिनों तक युद्ध चला। दसवें दिन माता ने उसका वध कर दिया। इसी की खुशी में दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है। इसी दिन राम ने रावण का वध किया था इसीलिए दशहरा भी मनाते हैं।
 
 
विजयादशमी का पर्व माता कात्यायिनी दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध करने के कारण मनाया जाता है जो कि श्रीराम के काल के पूर्व से ही प्रचलन में रहा है। इस दिन अस्त्र-शस्त्र और वाहन की पूजा की जाती है।
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