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नवरात्रि की तृतीया देवी चंद्रघंटा की पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 1 अप्रैल 2025 (14:59 IST)
Maa Chandraghanta : चैत्र नवरात्रि या नवदुर्गा पूजन के तीसरे दिन तृतीया की देवी मां चंद्रघंटा का पूजन किया जाता है। इसके बाद उनकी पौराणिक कथा या कहानी पढ़ी या सुनी जाती है। आइये यहां जानते हैं देवी चंद्रघंटा की पूजा विधि, आरती, भोग, मंत्र और माता के स्वरूप सहित सभी कुछ।ALSO READ: चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि कैसे मनाते हैं, जानें 5 प्रमुख बातें
 
चंद्रघंटा देवी का स्वरूप : माता चंद्रघंटा का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। माता के तीन नैत्र और दस हाथ हैं। इनके कर-कमल गदा, बाण, धनुष, त्रिशूल, खड्ग, खप्पर, चक्र और अस्त्र-शस्त्र हैं, अग्नि जैसे वर्ण वाली, ज्ञान से जगमगाने वाली दीप्तिमान देवी हैं चंद्रघंटा। ये शेर पर आरूढ़ है तथा युद्ध में लड़ने के लिए उन्मुख है।
 
मां चंद्रघंटा का भोग- आज के दिन मां सफेद चीज का भोग जैसे दूध या खीर का भोग लगाना चाहिए। इसके अलावा माता चंद्रघंटा को शहद का भोग भी लगाया जाता है।
 
मां चंद्रघंटा के मंत्र:-
सरल मंत्र : ॐ एं ह्रीं क्लीं
मां चंद्रघंटा का बीज मंत्र है- ‘ऐं श्रीं शक्तयै नम:’
 
माता चंद्रघंटा का उपासना मंत्र- 
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।
 
मां चंद्रघंटा महामंत्र- ‘या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नसस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:'। ALSO READ: चैत्र नवरात्रि पर निबंध, जानिए नवरात्रि के दौरान क्या करें और क्या न करें
 
मां चंद्रघंटा देवी की पूजा विधि- 
नवरात्रि में तीसरे दिन देवी मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व है।
देवी चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालुओं को भूरे रंग के कपड़े पहनने चाहिए। 
मां चंद्रघंटा को अपना वाहन सिंह बहुत प्रिय है और इसीलिए गोल्डन रंग के कपड़े पहनना भी शुभ है।
तृतीया के दिन भगवती की पूजा में दूध की प्रधानता होनी चाहिए। 
पूजन के उपरांत वह दूध ब्राह्मण को देना उचित माना जाता है। 
इस दिन सिंदूर लगाने का भी रिवाज है। 
 
मां चंद्रघंटा माता की आरती: 
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम
पूर्ण कीजो मेरे काम 
चंद्र समान तू शीतल दाती
चंद्र तेज किरणों में समाती
क्रोध को शांत बनाने वाली
मीठे बोल सिखाने वाली
मन की मालक मन भाती हो
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो 
सुंदर भाव को लाने वाली 
हर संकट मे बचाने वाली 
हर बुधवार जो तुझे ध्याये 
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय 
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं 
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं 
शीश झुका कहे मन की बाता 
पूर्ण आस करो जगदाता 
कांची पुर स्थान तुम्हारा 
करनाटिका में मान तुम्हारा 
नाम तेरा रटू महारानी 
'भक्त' की रक्षा करो भवानी 
 
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