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  4. Will Pasmanda Muslim become a game changer for BJP through the Waqf Amendment Bill?
Last Updated : बुधवार, 2 अप्रैल 2025 (14:19 IST)

वक्फ संशोधन बिल के जरिए क्या पसमांदा मुसलमान भाजपा के लिए बनेगा गेमचेंजर?

Waqf Amendment Bill
मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल का पहला एक साल पूरे होने से ठीक पहले वक्फ संशोधन बिल पास कराने की ओर बढ़कर एक बड़ा सियासी दांव चल दिया है। लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश करते हुए अल्पसंख्य कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस बिल का फायदा बैकवर्ड मुस्लिमों और महिलाओं को होगा और उन्हें अब प्रतिनिधित्व प्राप्त होगा। किरेन रिजिजू ने कहा कि अगर नरेंद्र मोदी की सरकार गरीब मुसलमानों के समर्थन कर रही है तो उसका विरोध क्यों हो रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने 70 साल से अधिक समय तक मुस्लिमों को सिर्फ एक वोट बैंक के रुप में देखा है। उन्होंने  कहा कि भाजपा सरकार देश के गरीब मुस्लिमों की चिंता कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर मोदी सरकार गरीब मुसलमानों के लिए काम कर रही तो उस पर आपत्ति क्यों है।

अल्पसंख्यक कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वक्फ बोर्ड में अब बैकवर्ड मुस्लिम और महिलाएं भी रहेगी। इसमें वक्फ काउंसिल में 2 महिलाएं की संख्या अनिवार्य हो गई, इससे पहले वक्फ काउंसिल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व नहीं था। उन्होंने कहा  कि जो मुस्लिम महिलाओं को दबाने की सोच रखते है वहा इसका विरोध कर रहे है।

पसमांदा मुस्लिमों पर भाजपा की नजर- वक्फ संसोधन बिल पर लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए जिस तरह से अल्पसंख्यक कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने बैकवर्ड मुस्लिमों और महिलाओं पर फोकस किया, उससे साफ है कि भाजपा की नजर वक्फ संशोधन बिल के जरिए पसमांदा मुसलमानों पर नजर है। किरेन रिजिजू ने कहा कि देश भर से बैकवर्ड मुसलमानों जिन्हें पसमांदा मुस्लिम कहा जाता है, वह संदेश दे रहे है कि बिल को जल्द पास कराइए।

वक्फ संशोधन बिल पर संसद की जेपीसी कमेटी की अध्यक्षता करने वाले भाजपा सांसद जगदंबिका पाल साफ कहते है कि इस बिल के पास होने से देश के गरीब पसमांदा और आम मुसलमानों को लाभ मिलेगा साथ ही विधेयक के जरिए वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।

पसमांदा समुदाय का दावा है कि भारत की पूरी मुस्लिम आबादी में उनकी हिस्सेदारी 80 फीसदी है और वह एक बड़ा वोट बैंक है। वहीं बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे सियासी रूप से बेहद अहम राज्य में पसमांदा मुस्लिमों की संख्या मुस्लिमों की कुल आबादी में 70 से 80 फीसदी है।

वक्फ संशोधन बिल से बिहार में BJP को चुनावी फायदा?- मोदी  सरकार वक्फ बोर्ड में ऐसे समय संशोधन कर रही है, जब पांच महीने बाद बिहार जैसे राज्य में विधानसभा चुनाव होने है।  चुनावी राज्य बिहार में 2023 में हुए जातीय सर्वे के मुताबिक राज्य में मुस्लिमों की आबादी 17.7 है। जिसमें 27 फीसदी अगड़ी जाति के मुसलमान हैं, जबकि 73 फीसदी बैकवर्ड क्लास के हैं। यहीं 73 फीसदी बैकवर्ड क्लास के मुस्लिम जिन्हें पसमांदा मुस्लिम कहा जाता है, भाजपा की नजर वक्फ संशोधन बिल के बहाने इस वोट बैंक पर है। पिछले कई वर्षों से भाजपा की नजर इन्हीं पसमांदा मुस्लिमों पर टिकी है। बिहार में पसमांदा मुसलमान की संख्या 73 फीसदी बताती है कि बिहार की आगे की राजनीति में अगड़ी जाति के मुसलमानों के मुकाबले अब पसमांदा मुसलमानों का दबदबा न केवल बढ़ेगा, बल्कि उनको केंद्रित करके ही सियासी दलों की रणनीति बनेगी।

उत्तरप्रदेश में पसमांदा मुसलमान गेमचेंजर?-वहीं उत्तर प्रदेश जैसे सियासी रूप से अहम बड़े राज्य में पसमांदा मुसलमानों की संख्या 4 करोड़ से अधिक है। भाजपा को उत्तर प्रदेश में होने वाले 2027 विधानसभा चुनाव में पसमांदा मुसलमानों को साधकर भाजपा अपने वोट शेयर बढ़ाना चाह रही है।  मुस्लिम समुदाय में पसमांदा मुसलमानों का वर्ग गरीब तबके से आते है और वह केंद्र औऱ राज्य की भाजपा सरकार की लाभार्थी योजना से प्रभावित था और उसने पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के समर्थन में वोट दिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार पसमांदा मुस्लिमों से बात करने और उनको पार्टी से जोड़ने पर जोर दे रहे है। पसमांदा मुसलमानों को आर्थिक रूप से मजबूत कर सरकार की योजनाओं का लाभ दिलवाकर भाजपा इस बड़े समुदाय को अपने साथ लाने की कोशिश में है। ऐसे में अब आने वाले  समय में बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में विधानसभा चुनाव होने है तब वक्फ संशोन बिल क्या भाजपा के  लिए गेमचेंजर बनेगा यह आने वाला वक्त  ही बताएगा।