आतंकियों की मददगार वेबसाइटों के मालिक लापता...!

नई दिल्ली| पुनः संशोधित रविवार, 4 जनवरी 2015 (15:26 IST)
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नई दिल्ली। जैसे आतंकी समूहों की ओर कथित तौर पर भारत विरोधी दुष्प्रचार चलाने वाली वेबसाइटों पर सरकार की कार्रवाई के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने पाया कि इनमें से कई पोर्टल के मालिकों के संपर्क का कोई विवरण नहीं है और इनका सर्वर देश से बाहर था।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि अमेरिका और यूरोप में डोमेन रजिस्टर करने वाली तथा दूसरी इकाइयों से किसी तरह का सहयोग नहीं मिल पाने के कारण इन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई चलाने में संबंधित एजेंसियों को दिक्कत आ रही है।

इन वेबसाइट पर आरोप है कि इन्होंने आईएसआईएस सहित कई आतंकी समूहों के दुष्प्रचार और राष्ट्र विरोधी सामाग्रियों की अनुमति दी तथा अपने मंच का इस्तेमाल करने दिया।
सरकार ने हाल ही में मुंबई की एक अदालत के आदेश के बाद 32 वेबसाइट को बंद किया था। अदालत ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए इन वेबसाइट पर कार्रवाई का आदेश दिया था।

इन वेबसाइट में से सिर्फ सात वेबसाइटों ने भारतीय अधिकारियों की ओर से भेज गए नोटिस का जवाब दिया और यह भरोसा दिलाया कि वे आतंक संबंधित सामाग्रियों के प्रचार-प्रसार के लिए अपने मंच का इस्तेमाल नहीं करने देंगे।
इन 32 वेबसाइट को बंद करने के कदम को लेकर ट्विटर एवं सोशल मीडिया के दूसरे मंचों पर हो रही आलोचना से बेफिक्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

सरकार की ओर से यह कार्रवाई उस वक्त की गई जब यह पाया गया कि देश में अशांति पैदा करने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के मकसद से इन वेबसाइट पर सामग्री पोस्ट की गईं।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इनमें से कुछ वेबसाइट का इस्तेमाल आईएसआईएस के कथित सदस्य अरीब मजीद के बारे में सामाग्री का दुष्प्रचार करने तथा कनार्टक के भटकल के निवासी अनवर हुसैन की मौत के बारे में दुष्प्रचार फैलाने के लिए किया गया। मजीद को एनआईए ने गिरफ्तार किया है।

अदालत के आदेश के मद्देनजर विभाग ने इन वेबसाइट की सामाग्री की जांच की और कहा कि ए वेबसाइट सोशल मीडिया वेबसाइट नहीं हैं। (भाषा)




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