biodatamaker

रफ्ता-रफ्ता लोगों के चेहरे के भाव बदलते रहे

Updated: बुधवार, 23 अगस्त 2017 (01:10 IST)
नई दिल्ली। मुसलमानों में तलाक-ए-बिदअत (तीन तलाक की प्रथा) को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले को लेकर शुरुआत में अदालत कक्ष में जहां भ्रम का माहौल रहा, वहीं रफ्ता-रफ्ता समय बीतने के साथ फैसला सुन रहे लोगों के चेहरों के रंग बदलते देखे गए।
 
पांच-सदस्यों की संविधान पीठ का नेतृत्व कर रहे मुख्य न्यायाधीश जेएस केहर ने सुबह साढ़े दस बजे जैसे ही कहा कि तीन तलाक को संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के तौर पर संरक्षण प्राप्त है और न्यायालय उसमें दखल नहीं दे सकता।
न्यायमूर्ति केहर अपना फैसला पढ़ते रहे और कक्ष में मौजूद एक वर्ग के चेहरे पर सुकून और दूसरे वर्ग के चेहरे पर मायूसी झलकने लगी। उस वक्त तक यह स्पष्ट नहीं था कि मुख्य न्यायाधीश अल्पमत का फैसला सुना रहे हैं। मीडिया के कुछ हिस्से में यह खबर आई कि न्यायालय ने तीन तलाक को सही ठहराया है और कानून बनाने के लिए छह माह का समय देकर गेंद विधायिका के पाले में डाल दिया है।
 
मुख्य न्यायाधीश के बाद न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की बारी आई और उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के फैसले से असहमति जताते हुए ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक और गैर-इस्लामिक करार दिया।
 
न्यायमूर्ति रोहिंगटन एफ नरीमन ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि वह और उनके साथ न्यायाधीश उदय उमेश ललित भी तलाक-ए-बिदअत को गैर-कानूनी मानते हैं और न्यायमूर्ति जोसेफ के आदेश से इत्तेफाक रखते हैं।
 
इसके बाद खुशी से झूमने की बारी उनकी थी जिनके चेहरे पर मुख्य न्यायाधीश के फैसले से मायूसी छा गई थी। दरअसल तीन न्यायाधीशों द्वारा तीन तलाक को असंवैधानिक ठहराए जाने के साथ ही बहुमत के फैसले के आधार पर तलाक-ए-बिदअत गैर-कानूनी हो चुका था।
 
लोग अदालत मे डटे थे और न्यायाधीशों के बीच हो रही आपसी बातचीत और घोषित फैसलों का मतलब निकाल रहे थे, तभी मुख्य न्यायाधीश ने घोषणा की कि इस मामले में न्यायाधीशों के भिन्न-भिन्न मंतव्यों को देखते हुए तीन:दो के बहुमत के फैसले के आधार पर तीन तलाक को निरस्त किया जाता है।
तब जाकर स्थिति स्पष्ट हुई कि न्यायमूर्ति केहर और न्यायमूर्ति नजीर का फैसला अल्पमत का था, इसलिए ट्रिपल तलाक पर छह माह की रोक का और कानून बनाने के लिए सरकार को निर्देश देने का कोई मतलब नहीं रह जाता। (वार्ता)
Show comments

क्‍यों नहीं हटे उज्‍जैन के खड़े हनुमान, चमत्‍कार या कुछ और, क्‍या है रील्‍स और वीडियो की हकीकत?

BRICS Summit 2026 : BRICS समिट के लिए भारत आएंगे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, 11 सितंबर को PM मोदी के साथ होगी द्विपक्षीय बैठक, इन मुद्दों पर होगी चर्चा

Apple Event 2026 : iPhone 18 से Foldable iPhone Ultra तक, जानिए 'Surprise and Shine' इवेंट में क्या-क्या होगा

2026 Maruti Baleno Facelift , ₹6.10 लाख से शुरू कीमत, नया इंजन और Level-2 ADAS जैसे धांसू सेफ्टी फीचर्स

‘नाराज फूफा जी चिल्लाएंगे- ट्रक वालों का क्या होगा?’ PM मोदी का तंज, फ्रेट कॉरिडोर पर गिनाईं उपलब्धियां

सभी देखें

ब्रिटेन में क्यों फंसे हैं विजय माल्या? भगोड़े कारोबारी ने किया बड़ा दावा

मजिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत..? छात्र को नोटिस भेजने पर भड़के CJI, ग्रेटर नोएडा प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार

सुप्रीम कोर्ट का सवाल, क्या अब नए खेल कानून के दायरे में आएंगे बीसीसीआई और राज्य क्रिकेट संघ?

उज्‍जैन के खड़े हनुमानजी के सामने सारी तकनीकें ध्‍वस्‍त, अब IIT इंदौर बताएगा क्‍या है वजह, कैसे विस्‍थापित होगी प्रतिमा?

डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से क्यों नाराज हैं भारतीय-अमेरिकी? मिडटर्म इलेक्शन पर दिखेगा असर

अगला लेख