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Ayodhya Ram Mandir : त्रेता युग सा अहसास! अनूठी है रात की रोशनी में नहाई रामनगरी अयोध्या

अयोध्या राम मंदिर
Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या का भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अब केवल दिन के उजाले में ही नहीं, बल्कि रात के सन्नाटे में भी अपनी अलौकिक आभा से श्रद्धालुओं का मन मोह रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर परिसर में 'स्थायी आर्किटेक्चरल लाइटिंग' (Permanent Architectural Lighting) की शुरुआत की है, जिसके बाद सूर्यास्त होते ही संपूर्ण मंदिर स्वर्णिम रोशनी में नहा उठता है। मंदिर के गगनचुंबी शिखर, नक्काशीदार स्तंभ और परकोटा की सुंदरता अब रात के अंधेरे में एक नया और दिव्य रूप बिखेर रही है।

​दिन ढलते ही बदल जाती है रामनगरी की फिजा

​दिन ढलते ही सरयू तट से आने वाली हवा का मिजाज बदलने लगता है। अयोध्या की गलियों की हलचल शाम ढलते-ढलते एक शांत और भक्तिमय माहौल में तब्दील हो जाती है। जैसे ही सूरज क्षितिज पार डूबता है, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का एक ऐसा स्वरूप सामने आता है, जिसे देखकर पहली बार यह अहसास होता है कि—रोशनी सिर्फ अंधेरा दूर नहीं करती, बल्कि इतिहास को स्वर्णिम अक्षरों में चमका भी देती है।
 
​पहले श्रद्धालु दिन में बंसी पहाड़पुर के गुलाबी बलुआ पत्थरों पर सूरज की किरणों को पड़ते और उसकी नक्काशी को जीवंत होते देखते थे। लेकिन अब रात की भी अपनी एक अनोखी और दिव्य कहानी है। ​मंदिर ट्रस्ट द्वारा साझा की गई तस्वीरों और वीडियो में राम मंदिर किसी साधारण इमारत की तरह नहीं, बल्कि रोशनी से तराशे गए किसी अलौकिक शिल्प की तरह दिखाई देता है।

​पत्थर भी बोलने लगते हैं : आर्किटेक्चरल लाइटिंग का जादू

​राम मंदिर का हर एक स्तंभ और उस पर उकेरी गई आकृतियां भारतीय शिल्प परंपरा की सदियों पुरानी तपस्या को दर्शाती हैं। दिन में इन्हें देखना जितना आनंददायक है, रात में सुनहरी रोशनी के बीच देखना उतना ही अलौकिक। ऐसा लगता है मानो ये नक्काशीदार पत्थर स्वयं रामकथा सुनाने लगे हों।
  • अद्भुत संयोजन : मंदिर का शिखर, परकोटा, मंडप, सीढ़ियां और संपूर्ण परिसर एक ऐसी सौम्य रोशनी में लिपटा रहता है जो आंखों को चुभती नहीं, बल्कि मन को ठहरकर देखने पर मजबूर कर देती है।
  • स्थापत्य को उभारने का उद्देश्य : इस विशेष लाइटिंग का उद्देश्य केवल उजाला करना नहीं, बल्कि मंदिर की बारीक नक्काशी, रेखाओं और स्थापत्य कला को पूरी गरिमा के साथ उभारना है।​


आस्था और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम

​रात के समय मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। वही मंदिर, जिसे उन्होंने चित्रों में देखा है, रात की रोशनी में एक बिल्कुल नई और आलौकिक पहचान ले लेता है। 
  • ​श्रद्धालुओं के अनुभव : कोई मोबाइल निकालकर इस पल को सहेज रहा है, तो कोई परिवार संग सेल्फी ले रहा है। कुछ श्रद्धालु ऐसे भी हैं जो बिना कुछ बोले घंटों बस मंदिर को निहारते रहते हैं—क्योंकि कुछ दृश्य कैमरे में नहीं, सीधे आत्मा में बसने के लिए होते हैं।
  • वैश्विक आकर्षण : देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं के साथ-साथ विदेशी पर्यटक भी इस स्वर्णिम छटा को अपने कैमरों में कैद कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।

​बदलती अयोध्या, बदलता 'नाइटस्केप'

​किसी भी ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर को इस प्रकार रोशन करना आसान काम नहीं था। ट्रस्ट ने रोशनी का संयोजन इस तरह तैयार कराया है कि कहीं भी कृत्रिम चमक का अहसास न हो, बल्कि मंदिर की मूल भव्यता ही निखर कर सामने आए। ​राम मंदिर के निर्माण के साथ अयोध्या का कायाकल्प हो चुका है—चौड़ी सड़कें, भव्य घाट, विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट। अब इस कड़ी में रात का नया 'नाइटस्केप' भी जुड़ गया है, जो आधुनिक तकनीक और सनातन आस्था के अटूट मेल को दर्शाता है।

​अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक खास सलाह

अगर राम मंदिर की वास्तविक भव्यता को महसूस करना है, तो केवल दिन में देखकर न लौटें... एक बार सूरज ढलने का इंतजार जरूर करें। क्योंकि रात होते ही यहां सिर्फ दीप और लाइटें नहीं जलतीं, बल्कि आस्था भी एक नए, स्वर्णिम रंग में चमकने लगती है।
 
लेखक के बारे में
संदीप श्रीवास्तव
संदीप श्रीवास्तव करीब 25 वर्ष से ज्यादा समय से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वेबदुनिया के लिए उत्तर प्रदेश में स्ट्रिंगर के रूप में कार्य करते हैं। .... और पढ़ें
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