राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, आरोपों से मुक्ति के लिए चंपत राय की कठोर साधना!
अयोध्या के तीर्थ क्षेत्र भवन में शुरू हुआ 4 महीने का चातुर्मास अनुष्ठान
Champat Rai Chaturmas: राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े विवादों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने आध्यात्मिक साधना का मार्ग चुन लिया है। अपने ऊपर लगे आरोपों से मुक्ति और आत्मिक शांति के लिए 80 वर्षीय चंपत राय ने अयोध्या में 4 महीने का चातुर्मास अनुष्ठान शुरू कर दिया है।
अनुष्ठान की मुख्य बातें
- रोजाना 6 घंटे का मौन व्रत : प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक वे पूरी तरह मौन रहेंगे।
- मंत्र जाप और मानस पाठ : मौन अवधि के दौरान निरंतर 'राम-मंत्र' का जाप और रामचरितमानस का पाठ करेंगे।
- अयोध्या से बाहर नहीं जाएंगे : 21 नवंबर (देवोत्थान एकादशी) तक वे अयोध्या छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।
- तीर्थ क्षेत्र भवन में साधना : पूरा अनुष्ठान परिसर से करीब 200 मीटर दूर स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र भवन में ही संपन्न होगा। ALSO READ: दान की गणना पर चंपत राय ने उठाए सवाल! आखिर किस पर साधा निशाना
विवादों से दूरी और सीमित मुलाकातें
चढ़ावा चोरी विवाद के बाद से ही चंपत राय सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर हैं। 23 जून के बाद से वे सार्वजनिक मंचों पर नजर नहीं आए हैं और 7 जून से ही तीर्थ क्षेत्र भवन में एकांतवास जैसा जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
भगवान राम पर छोड़ा न्याय का फैसला
चंपत राय का अटूट विश्वास है कि केवल भगवान श्रीराम ही उन्हें इन आरोपों और कलंक से मुक्त करेंगे। हालांकि, ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि यह एक विशुद्ध धार्मिक प्रक्रिया है और इसका किसी विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। अयोध्या के कई संतों और स्थानीय व्यापारी समाज ने भी तीर्थ क्षेत्र भवन पहुंचकर चंपत राय के प्रति अपना समर्थन और विश्वास व्यक्त किया है। ALSO READ: राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा बदलाव, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर, कृष्ण मोहन को मिली नई जिम्मेदारी
क्या होता है चातुर्मास अनुष्ठान?
हिंदू पंचांग के अनुसार, चातुर्मास आषाढ़ शुक्ल एकादशी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक (सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक) चलता है। इस दौरान साधु-संत यात्राएं रोककर एक ही स्थान पर रहकर जप, तप और स्वाध्याय करते हैं। मान्यता है कि इन 4 महीनों में भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, इसलिए विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। चातुर्मास में लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा और तामसिक भोजन का पूरी तरह त्याग कर सात्विक जीवन अपनाया जाता है।

