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वैज्ञानिकों ने खोजा दुर्लभ और सबसे चमकदार ‘सुपरनोवा’

Updated: मंगलवार, 13 जुलाई 2021 (12:50 IST)
नई दिल्ली, अंतरिक्ष के रहस्य सुलझाने में जुटे वैज्ञानिकों को हाल में एक बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। उन्हें एक अत्यंत दुर्लभ सुपरल्यूमिनस सुपरनोवा (एसएन-2020 एएनके) खोज निकाला है।

यह सुपरनोवा बेहद शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र के साथ दूसरे न्यूट्रॉन तारे से मिल रही ऊर्जा से चमक रहा है। यह खोज आकाशीय पिंडों के रहस्य सुलझाने में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

इस प्रकार के सुपरनोवा को सुपरल्यूमिनस सुपरनोवा (एसएलएसएनई) इसलिए कहा जाता है, क्योंकि वे आमतौर पर बहुत बड़े तारों (न्यूनतम द्रव्यमान की सीमा सूर्य के 25 गुना से अधिक) से उत्पन्न होते हैं। हमारी आकाशगंगा मिल्की-वे अथवा आसपास की आकाशगंगाओं में ऐसे विशाल तारों की संख्या सीमित है।

उनमें एसएलएसएनई-1 स्पेक्ट्रोस्कोपिक तौर पर अब तक पुष्टि की गई लगभग 150 आकाशीय पिंडों में शामिल है। इन प्राचीन पिंडों में वे सुपरनोवा शामिल हैं, जिनके बारे में अब तक ज्ञात जानकारी बहुत सीमित है। इस सीमित जानकारी की सबसे बड़ी वजह यही है कि उनके अंतर्निहित स्रोतों के विषय में पुख्ता जानकारियों का अभाव है।

इस शोध को मासिक जर्नल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी के हालिया अंक में भी प्रकाशित किया गया है। यह अध्ययन गत वर्ष लॉकडाउन के दौरान यह किया गया था। शोध के अंतर्गत गत वर्ष मार्च एवं अप्रैल के बीच तीन दूरबीनों के माध्यम से यह अध्ययन किया गया।

अध्ययन के दौरान नजर आया कि यह सुपरनोवा नीली रोशनी के साथ अपनी चमक बिखेर रहा था। उसमें यही दृष्टिगत हुआ कि किसी परतदार संरचना के छिलके बाहर उतार दिए गए हों और उसका केंद्र किसी अन्य ऊर्जा स्रोत से चमक रहा है।

इसकी पड़ताल में यही पता चला कि यह चमक एक अत्यंत शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र के साथ एक अनोखे न्यूट्रॉन तारे की ऊर्जा के कारण उत्पन्न होती है। हालांकि इस चमक के पीछे की प्रविधि वैज्ञानिकों के लिए अभी भी एक पहेली ही बनी हुई है। इस चमक की गुत्थी को पारंपरिक पावर सोर्स मॉडल के उपयोग से भी नहीं सुलझाया जा सका है। इस मॉडल में Ni56 - Co56 - Fe56 का विघटन शामिल है।

उल्लेखनीय है कि इस प्रकार के सुपरनोवा को लेकर पहले बहुत अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं थी। वहीं इस शोध के दौरान जिस एसएन-2020 एएनके को खोजा गया है, उसका द्रव्यमान हमारे सौर परिवार की सबसे विशालकाय चमकीली संरचना सूर्य से 3.6 से 7.2 गुना तक अधिक है। एसएन-2020 एएनके की खोज सबसे पहले 19 जनवरी 2020 को ज्विकी ट्रांजिएंट फैसिलिटी द्वारा की गई थी।

सुपल्यूमिनस सुपरनोवा से जुड़ा यह शोध उत्तराखंड के नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडेय के मार्गदर्शन में उनके शोधार्थी अमित कुमार के नेतृत्व में पूरा हुआ। यह संस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्गत संचालित एक स्वायत्त संस्थान है। (इंडिया साइंस वायर)

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