20 जुलाई को कहां थे भागवत? RSS के Gen-Z संवाद पर CJP प्रमुख दीपके का हमला, बोले- अब बहुत देर हो गई!
RSS chief Mohan Bhagwat Gen-Z card: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा जनरेशन जेड (Gen-Z) के युवाओं के साथ संवाद की पहल पर सेंटर फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने भागवत के इस कदम को महज एक 'देर से उठाया गया राजनीतिक कदम' करार देते हुए तंज कसा कि संघ को युवाओं की याद तब आई जब जंतर-मंतर पर युवाओं के आंदोलन ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया।
20 जुलाई को कहां थे मोहन भागवत?
अभिजीत दीपके ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीधे संघ प्रमुख की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आरएसएस का जनरेशन जेड से बात करना बहुत देर से उठाया गया कदम है। भागवत भाजपा के गॉडफादर हैं। अगर उन्हें युवाओं की इतनी ही चिंता थी, तो उन्हें 20 जुलाई को जनरेशन जेड के उन बच्चों से बात करनी चाहिए थी, जब सड़कों पर उन पर लाठियां बरसाई जा रही थीं। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर प्रताड़ित किए गए युवाओं के पास जाना चाहिए था और प्रधानमंत्री से उनसे माफी मंगवानी चाहिए थी। ALSO READ: Mohan Bhagwat : Gen Z पर आंख मूंदकर भरोसा करूंगा, छात्रों के प्रदर्शन को राष्ट्रविरोधी न बताएं, RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, चीन और पाकिस्तान को लेकर क्या कहा
CJP का रोडमैप : संस्थागत जवाबदेही और सुधारों पर जोर
अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि उनका संगठन युवाओं की आवाज बनकर बुनियादी और संस्थागत सुधारों के लिए संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख मुद्दों को उठाया:
- शिक्षा प्रणाली : उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई व्यापार नहीं, बल्कि एक मौलिक अधिकार है। संगठन देश में व्यापक शैक्षणिक सुधारों के लिए दबाव बनाएगा। ALSO READ: हम कॉकरोच हैं, आसानी से नहीं निकलेंगे! शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद CJP चीफ दीपके का बयान, 49 दिन चले आंदोलन का अंत
- चुनावी सुधार और चुनाव आयोग : चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दीपके ने कहा कि जिस तरह से सरकार तय कर रही है कि मतदाता कौन होगा, इस तरह से लोकतंत्र नहीं चल सकता। संस्थाओं के खिलाफ लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर दिख रहा है।
- न्यायिक सुधार : उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायपालिका में आम लोगों के लिए न्याय की प्रक्रिया धीमी है, जबकि हाई-प्रोफाइल मामलों में रातों-रात और आधी रात को सुनवाई हो जाती है।
- मीडिया की भूमिका : गोदी मीडिया और एकतरफा पत्रकारिता पर हमला बोलते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मीडिया केवल सरकार के एजेंडे को 'मास्टरस्ट्रोक' बताता रहेगा और जनमुद्दों को नजरअंदाज करेगा, तो लोग टीवी देखना बंद कर देंगे। अगर दर्शक ही नहीं रहेंगे, तो विज्ञापनों का मीडिया घराने क्या करेंगे?
कार्रवाई का डर नहीं, हम बहुत कुछ सह चुके
सरकारी दमन या दंडात्मक कार्रवाई के सवाल पर दीपके ने बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों ने जंतर-मंतर पर भारी उत्पीड़न झेला है, यहां तक कि उनके वॉशरूम का पानी तक काट दिया गया था। उन्होंने कहा कि हम पहले ही बहुत कुछ देख चुके हैं। इससे अधिक कठोर कार्रवाई अब और क्या होगी? अगर सरकार हमें जेल में डालना चाहती है, तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है, हम डरने वाले नहीं हैं। ALSO READ: Gen Z पर मोहन भागवत के बयान से सियासी बवाल, प्रियंका गांधी बोलीं- छात्रों को किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं
संघ प्रमुख का रुख और केंद्र सरकार में हलचल
जंतर-मंतर पर युवाओं के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद संघ और सरकार के भीतर स्पष्ट रूप से बेचैनी देखी जा रही है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जनरेशन जेड और जनरेशन अल्फा के रुख को स्वीकार करते हुए कहा कि आज के युवाओं के लिए विरोध प्रदर्शन संवाद का ही एक तरीका है। उन्होंने माना कि युवाओं की शिकायतें जायज हैं और वे तर्कसंगत जवाब चाहते हैं। भागवत ने यहां तक कहा कि 'Gen-Z हमारी पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार है।'
युवाओं के आक्रोश को भांपते हुए प्रधानमंत्री मोदी के हालिया वीडियो के बाद केंद्र सरकार में हलचल तेज हो गई है। पिछले 10 दिनों में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और सरकारी विभागों ने युवाओं से जुड़ने के लिए छोटे, एडिटेड रील्स और क्लिप्स की बाढ़ ला दी है। यहां तक कि विदेश मंत्रालय ने भी आधिकारिक तौर पर स्नैपचैट (Snapchat) से जुड़ने का फैसला किया है।

