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Explainer: राम मंदिर ट्रस्ट में कौन-कौन शामिल हैं? जानिए सभी सदस्यों के नाम और उनके अधिकार

Ayodhya Ram Mandir
Sri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और उसके प्रबंधन की देखरेख के लिए 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' देश की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है। हाल के दिनों में मंदिर प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर आई कुछ खबरों के बाद यह ट्रस्ट एक बार फिर सुर्खियों में है।
 
आइए एक 'Explainer' के जरिए समझते हैं कि इस ट्रस्ट का गठन कैसे हुआ, इसमें कौन-कौन शामिल हैं, पदेन (Ex-officio) सदस्यों की क्या भूमिका है, और इसके शीर्ष अधिकारियों का कद क्या है।

1. ट्रस्ट का गठन कब और क्यों हुआ?

इस ट्रस्ट की नींव देश की सर्वोच्च अदालत के ऐतिहासिक फैसले पर टिकी है। 9 नवंबर 2019 को अयोध्या के बाबरी मस्जिद-राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था।
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश (पृष्ठ 926, भाग Q) : कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह फैसले के तीन महीने के भीतर 'अयोध्या में कुछ निश्चित क्षेत्र के अधिग्रहण अधिनियम 1993' के तहत एक योजना तैयार करे। इसी योजना के तहत मंदिर निर्माण और प्रबंधन के लिए ट्रस्टियों के एक बोर्ड (Trust) के गठन का प्रावधान किया गया।
 
घोषणा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी 2020 को संसद में इस ट्रस्ट के गठन का आधिकारिक ऐलान किया था। शुरुआत में इसके 15 सदस्यों में से 12 को भारत सरकार द्वारा नामित किया गया था, और 3 अन्य सदस्यों का चयन पहली बैठक में हुआ। ALSO READ: अयोध्या कांड में जीजा-साले निकले महाचोर, दान चोरी में अब होगी ED और IT की एंट्री

2. वर्तमान में ट्रस्ट में कौन-कौन शामिल हैं? (14 सदस्यों की सूची)

ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वर्तमान में इसमें 14 प्रमुख सदस्य सूचीबद्ध हैं:
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3. पदेन (Ex-officio) सदस्य क्यों महत्वपूर्ण हैं?

पदेन सदस्य ट्रस्ट के भीतर 'सरकार की आंख और कान' माने जाते हैं। वे सरकार और ट्रस्ट के बीच सीधे संपर्क (Liaison) का काम करते हैं। ट्रस्ट की वित्तीय सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी इन्हीं अधिकारियों पर होती है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी पर बागेश्वर बाबा का विस्फोटक दावा, कहा- अगर उनकी पर्ची खोल दी तो....

प्रमुख नौकरशाहों का प्रोफाइल:

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नृपेंद्र मिश्रा (निर्माण समिति अध्यक्ष) : यूपी कैडर के पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और पीएम नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव (Principal Secretary)। नृपेंद्र मिश्रा का प्रशासनिक कद बहुत बड़ा रहा है। वे 1990-91 में मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव भी रह चुके हैं। 2014 में उनकी प्रधान सचिव के रूप में नियुक्ति के लिए मोदी सरकार ने ट्राई (TRAI) अधिनियम के नियमों को बदलने के लिए एक विशेष अध्यादेश भी जारी किया था। मंदिर निर्माण कार्य की पूरी देखरेख उन्हीं के जिम्मे रही है। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी
 
प्रशांत लोखंडे (IAS) : 2001 बैच के AGMUT कैडर के अधिकारी हैं। वर्तमान में वे सीबीएसई (CBSE) के अध्यक्ष होने के साथ-साथ गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव भी हैं। वे ट्रस्ट में केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के मुख्य संपर्क व्यक्ति हैं। (उनसे पहले यह भूमिका वर्तमान चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार संभाल रहे थे)।
 
संजय प्रसाद (IAS) : 1995 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के सबसे प्रभावशाली नौकरशाहों में से एक हैं। वर्तमान में वे यूपी के मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रमुख भूमिकाओं के साथ-साथ गृह, सूचना, सतर्कता (Vigilance) और प्रोटोकॉल जैसे बेहद महत्वपूर्ण विभाग संभाल रहे हैं।

4. अधिकार, विवाद और हालिया बयान

हाल ही में जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दान की चोरी या वित्तीय गबन के आरोपों पर चर्चा हुई, तो ट्रस्ट की ओर से केवल निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने ही मीडिया के सामने आकर पक्ष रखा था, जो ट्रस्ट में उनके ऊंचे प्रशासनिक कद को दिखाता है।
 
जून 2026 में मीडिया में उनके उस बयान की भी काफी चर्चा हुई थी जिसमें उन्होंने कहा था कि "पूरे राम मंदिर प्रबंधन को बदलने की जरूरत है।" जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और सरकार की छवि को किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कड़े कदम उठाए जाने के संकेत मिलते रहे हैं।
 
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट केवल एक धार्मिक निकाय नहीं है, बल्कि इसमें देश के शीर्ष स्तर के नौकरशाह और कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत मंदिर का संचालन पूरी तरह संप्रभु और जवाबदेह तरीके से हो।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 
लेखक के बारे में
वृजेन्द्रसिंह झाला
वृजेन्द्रसिंह झाला पिछले 30 से ज्यादा वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रिंट एवं डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य का अनुभव। वर्तमान में वेबदुनिया की न्यूज टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।    अनुभव : वृजेन्द्रसिंह झाला तीन दशक से ज्यादा का प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया का अनुभव है। वर्तमान.... और पढ़ें