16 राज्यों में बिजली संकट, एक चौथाई पॉवर प्लांट बंद, रेलवे ने कोयला सप्लाय के लिए बनाया नया प्लान

Last Updated: शुक्रवार, 29 अप्रैल 2022 (13:03 IST)
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नई दिल्ली। भीषण गर्मी और कोयले की किल्लत के चलते देश के कई राज्यों में गहरा गया है। केंद्र और राज्य सरकारें लगातार दावे कर रही हैं कि बिजली संकट नहीं छाएगा। इस बीच खबरें हैं कि बिजली संयंत्रों में कम उत्पादन के बीच राज्य भारी मांग को पूरा करने के लिए जूझ रहे हैं। एक चौथाई पॉवर प्लांट कोयले की कमी से बंद हो गए हैं। इस बीच रेलवे ने पॉवर प्लांट्स को कोयला सप्लाय करने वाली मालगाड़ियों को रास्ता देने के लिए ट्रेनों के 670 फेरे रद्द कर दिए हैं।
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जम्मू-कश्मीर से लेकर आंध्रप्रदेश तक उपभोक्ताओं को 2 घंटे से 8 घंटे तक की बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। बिजली कटौती से कारखाने सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। देश में मार्च में रिकॉर्ड गर्मी के बाद अप्रैल में भी अत्यधिक गर्मी जारी है। ऐसे में बिजली की मांग अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।
देश में 27 अप्रैल को बिजली की अधिकतम मांग 200.65 गीगावॉट रही, जबकि व्यस्त समय में बिजली की कमी 10.29 गीगावॉट थी। ताजा आंकड़ों से पता चला है कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की निगरानी वाले 147 संयंत्रों में 26 अप्रैल को कोयला भंडार मानक का 25 प्रतिशत था। हालांकि कहा जा रहा है कि बिजली संकट इससे कही ज्यादा गहरा है।

यात्री ट्रेनों के 670 फेरे रद्द : इस बीच भारतीय रेलवे ने बिजली संयंत्रों के लिए कोयला ले जाने वाली ट्रेनों को रास्ता देने के लिए ट्रेनों के 670 फेरे रद्द कर दिए हैं। रेल मंत्रालय ने 24 मई तक ट्रेनों को रद्द करने की अधिसूचना भी जारी कर दी है। रेलवे ने कोयले को ले जाने के लिए 415 ट्रेने उपलब्ध कराने जा रहा है। प्रत्येक ट्रेन में लगभग 3,500 टन कोयला ले जाया जा सकता है।
इन राज्यों में बिजली संकट : झारखंड, जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, उत्तराखंड, महाराष्‍ट्र, मध्यप्रदेश, बिहार, पंजाब, तमिलनाडु, ओडिशा और गोवा बिजली की कमी से जूझ रहे हैं। इनमें से कई राज्यों में घंटों बिजली गुल रहती है। भीषण गर्मी में लाइट चले जाने से लोग परेशान है।

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9 वर्षों में सबसे कम कोयला भंडार : देश में बिजली की कुल कमी 62.3 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा मार्च में कुल बिजली की कमी से अधिक है। इस संकट के केंद्र में कोयले की कमी है। देश में कोयले से 70 प्रतिशत बिजली का उत्पादन होता है। सरकार दावा कर रही है कि मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त कोयला उपलब्ध है, लेकिन बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार 9 वर्षों में सबसे कम हैं।
इसके अलावा यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के साथ कोयले के आयात में गिरावट आई है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने कहा कि देशभर के ताप संयंत्र कोयले की कमी से जूझ रहे हैं, जो देश में बिजली संकट का संकेत है।

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पंजाब में 40 प्रतिशत बढ़ी मांग : पंजाब के ऊर्जा मंत्री हरभजन सिंह ने कहा कि बढ़ते तापमान से पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में इस साल बिजली की मांग में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि केवल पंजाब ही नहीं, अन्य राज्य भी इसी तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
यूपी में आपूर्ति में रिकॉर्ड कमी : भारत में सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में 3,000 मेगावॉट बिजली की कमी है। लगभग 23,000 मेगावॉट की मांग के मुकाबले आपूर्ति सिर्फ 20,000 मेगावॉट है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में बिजली कटौती की जा रही है।



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