स्कूली पाठ्यक्रम से हटाया नेहरू का नाम, बवाल...

जयपुर| पुनः संशोधित रविवार, 8 मई 2016 (17:18 IST)
जयपुर। भाजपा शासित राजस्थान में कक्षा 8 की नई पाठ्य पुस्तक से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का नाम हटा दिया गया है। पूर्व में प्रकाशित पुस्तक में नेहरू के बारे में लिखा गया था कि बैरिस्टर बनने के बाद उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया और बाद में के अध्यक्ष भी बने और वह आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बने।
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर से संबंधित पाठयक्रम में कक्षा 8 के सामाजिक विज्ञान की संशोधित पुस्तक में नेहरू के बारे में कोई उल्लेख नहीं है। हालांकि संशोधित पुस्तक बाजार में उपलब्ध नहीं है। इस पुस्तक के प्रकाशक राजस्थान पाठ्य पुस्तक मंडल ने इसे वेबसाइट पर अपलोड किया है।
 
पुस्तक के संशोधित संस्करण में स्वतंत्रता सेनानी हेमू कालानी का नाम जोड़ा गया है। साथ में वीर सावरकर, महात्मा गांधी, भगतसिंह, बाल गंगाधर तिलक, सुभाषचंद्र बोस आदि अन्य नामों का पहले से उल्लेख है, लेकिन नेहरू का नाम ना तो पुस्तक के स्वतंत्रता संग्राम के पाठ में और ना ही आजादी के बाद के भारत के पाठ में उल्लेखित है। संशोधित पुस्तक का पाठयक्रम उदयपुर के राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा तैयार किया गया है।
 
राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता रामेश्वर डूडी ने इस मामले पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार राजस्थान में अपना एजेंडा लागू करने में आगे बढ़ रही है और उसने देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेता जवाहर लाल नेहरू का नाम हटाकर ओछी राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस मुद्दे को जोर से उठाया जाएगा। राजस्थान के शिक्षामंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी से कई बार की कोशिशों के बावजूद संपर्क नहीं हो सका। 
 
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि स्कूली पाठ्य पुस्तकों से इतिहास पुरुष राष्ट्र निर्माताओं का नाम हटाने वाली सरकारें खुद हट जाती हैं, लेकिन इतिहास का सच नहीं मिटता। उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माता और दुनिया के सबसे बड़े भारतीय लोकतंत्र के संस्थापक प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू का नाम स्कूली पाठ्य पुस्तकों से हटा देने का राजस्थान सरकार का कृत्य शर्मनाक है।
 
गहलोत ने कहा कि संघर्ष और निर्माण के बेमिसाल राष्ट्रीय योगदान पर पर्दा डालने की यह कोशिश इतिहास की इस कड़वी सच्चाई को ढंक नहीं सकती कि राष्ट्रवाद का दंभ जताने वाले आरएसएस ने राष्ट्रवाद के इतिहास के सबसे बड़े तकाजे आजादी की लड़ाई से न केवल अपने को दूर रखा था, बल्कि सविनय अवज्ञा से लेकर अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन तक का विरोध भी किया था।
 
उन्होंने कहा कि संघर्ष के गौरवपूर्ण इतिहास में जो आरएसएस अपनी जगह नहीं बना सका, उसकी सरकार नेहरू को पाठ्यक्रम से निकालकर जो पाप कर रही है, उन्हें जनता सबक सिखाएगी। राजस्थान बोर्ड की 8वीं कक्षा की किताब में नेहरू का नाम तो हटाया ही गया है, गांधी की हत्या वाले हिस्से और हत्यारे नाथूराम गोडसे का नाम भी हटा दिया गया।
 
गहलोत ने कहा कि गोडसे की गोली गांधी को जनमानस में नहीं मार सकी थी। इसी वजह से महात्मा गांधी आज भी जनमानस में व्याप्त हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी गांधीजी के नाम का जप करना पड़ रहा है। गोडसे की विचारधारा से प्रेरित यह कारनामा भी नेहरू के महान योगदान को नहीं मिटा सकेगा।
 
उन्होंने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में या भारत की संस्कृति में मान्य रही पंचायत प्रणाली को पंचायतीराज के रूप में आधुनिक संविधान की व्यवस्था में स्थापित करने वाले और नागौर, राजस्थान से ही उसका उद्घाटन करने वाले के रूप में भी नेहरू का नाम हटा दिया गया, जो राजस्थान सरकार की संकीर्ण सोच को उजागर करता है। ऐसी साजिश को जनता के बीच बेनकाब करने का अभियान चलाया जाना चाहिए। (भाषा) 



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