dharma sangrah
✕

संसदीय समिति ने की खुफिया एजेंसियों की खिंचाई, जानिए क्यों...

Updated: रविवार, 16 अप्रैल 2017 (11:43 IST)
नई दिल्ली। पठानकोट, उड़ी और कुछ अन्य जगहों पर हुए आतंकी हमलों के संदर्भ में खुफिया एजेंसियों की खिंचाई करते हुए एक स्थायी संसदीय समिति ने कहा है कि इन हमलों से एजेंसियों की खामियां उजागर हुईं लेकिन उनकी असफलता का कोई विश्लेषण नहीं किया गया।
 
गृह मामलों की स्थायी संसदीय समिति ने कहा है कि 2 जनवरी 2016 को पठानकोट स्थित वायुसेना स्टेशन पर आतंकी हमला हुआ और इसके 1 साल बीत जाने के बावजूद राष्ट्रीय जांच एजेंसी इसकी जांच पूरी नहीं कर पाई है।
 
पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम की अगुवाई वाली समिति ने आगे कहा है कि पठानकोट, उड़ी, पम्पोर, बारामूला और नगरोटा में हुए हमलों के संदर्भ में विश्वसनीय तथा कार्रवाई योग्य सूचनाएं मुहैया कराने में खुफिया एजेंसियों की विफलता को लेकर लगता नहीं कि कोई विश्लेषण किया गया।
 
रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति का मानना है कि इन हमलों ने हमारी खुफिया एजेंसियों की खामियों को उजागर किया। पठानकोट हमले में 7 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे वहीं पिछले साल 18 सितंबर को उड़ी स्थित ब्रिगेड मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले में सेना के 19 जवान शहीद हुए थे। 25 जून 2016 को श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर सीआरपीएफ के वाहनों के काफिले पर हुए आतंकी हमले में अर्द्धसैनिक बल के 8 जवान मारे गए थे।
 
जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में आतंकवादियों ने 3 अक्टूबर 2016 को राष्ट्रीय रायफल्स के शिविर पर हमला कर एक सुरक्षाकर्मी को मार डाला था। 29 नवंबर 2016 को राज्य के नगरोटा में आतंकियों ने सेना के एक शिविर पर हमला कर 7 जवानों को मार डाला था।
 
घुसपैठ में आई तेजी को ध्यान में रखते हुए समिति ने कहा है कि सरकार को सीमा पार से नियंत्रण रेखा पर होने वाली घुसपैठ के प्रयासों में अचानक आई तेजी की व्यापक जांच करनी चाहिए और उन कारकों का पता लगाना चाहिए जिनका घुसपैठिए फायदा उठाते हैं।
 
वर्ष 2016 में घुसपैठ के 364 प्रयास हुए जिनमें से 112 सफल रहे जबकि वर्ष 2015 में हुए घुसपैठ के 121 प्रयासों में से 33 प्रयास सफल रहे थे। समिति ने यह भी कहा कि सीमा के दूसरी ओर से सुरंगों के जरिए घुसपैठ की घटनाओं में भी वृद्धि हुई है।
 
समिति को लगता है कि यह भविष्य में घुसपैठियों के लिए बड़ा काम बन सकता है और सरकार को ऐसे प्रयासों को नाकाम करने के लिए कदम उठाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति सिफारिश करती है कि मंत्रालय को सीमाई इलाकों में सुरंगों का पता लगाने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित समाधान तलाशना चाहिए और उन अन्य देशों की मदद लेनी चाहिए जिन्होंने सुरंगों का पता लगाने के लिए सफलतापूर्वक प्रणालियां विकसित की हैं। (भाषा)
Show comments

बेंगलुरु में बड़ा हादसा टला, रनवे से टकराया IndiGo का विमान, हादसे के बाद रोकी प्लेन की उड़ान

प्रस्‍ताव ठुकराने पर भड़का ईरान, अमेरिका को फिर दी धमकी, चेतावनी पर क्‍या बोले डोनाल्‍ड ट्रंप?

दिल्ली के तिलक नगर में मचा बवाल, मंत्री प्रवेश वर्मा ने युवक को जड़ा थप्पड़, मामले पर क्‍या बोले अरविंद केजरीवाल?

Mann Ki Baat : जनगणना से सामने आएगा देश की आबादी का नया आंकड़ा, 32 करोड़ से ज्यादा परिवारों का डेटा दर्ज, PM मोदी ने बताया कितना बड़ा काम हुआ पूरा

पाकिस्‍तान को भारत की दो टुक, एस. जयशंकर का UNGA में आतंकवाद पर बड़ा अटैक, दूसरे देश क्‍यों भुगत रहे सजा?

सभी देखें

Gold Price Crash : सोने में 4000 से ज्यादा की गिरावट, चांदी भी हुई सस्ती, जानिए क्यों गिर रहे हैं भाव, क्या खरीदने का सही समय

क्रिकेट से सॉफ्ट टेनिस की ओर, इत्तेफाक ने कैसे बदला देवास के जय मीणा का सफर

Ather Konarc : इस Electric Scooter पर मिल रहा बड़ा फायदा, जानें किस वेरिएंट पर कितनी सब्सिडी

उज्जैन में छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद का हिस्सा समुदाय द्वारा स्वत: हटाया जा रहा है-कलेक्टर रोशन सिंह

CEC Gyanesh Kumar Row : ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, पटना में वाटर कैनन का इस्तेमाल, SIR को लेकर उठाए सवाल

अगला लेख