नरेंद्र मोदी 8 बार लाल किले से झंडा फहराने वाले पहले गैर कांग्रेसी PM, चंद्रशेखर को नहीं मिला एक भी मौका

Last Updated: रविवार, 15 अगस्त 2021 (08:34 IST)
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75वें पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने 8वीं (2014 से 2021) बार लाल किले से झंडा फहराया। मोदी 8 बार तिरंगा फहराने वाले पहले गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं। पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम सर्वाधिक 17 बार तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड है।
सबसे ज्यादा समय तक सत्ता में रहने वाले पहले गैर भाजपाई प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 6 बार राष्ट्रध्वज फहराया था। दूसरी ओर, चंद्रशेखर और कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे गुलजारी लाल नंदा को यह मौका एक बार भी नहीं मिला।

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार अगस्त 2014 में लाल किले से झंडा फहराया था। 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर एक साल में दो बार तिरंगा फहराकर भी इतिहास रचा था। दरअसल, आजाद हिंद सरकार की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर लाल किले में बेहद खास कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

रिकॉर्ड नेहरू के नाम : सर्वाधिक 17 बार झंडा फहराने का रिकॉर्ड देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नाम है। उन्होंने 15 अगस्त 1947 से 1964 तक लगातार 17 बार लाल किले पर तिरंगा फहराया। पंडित नेहरू ने पहली बार लाल किले पर 15 अगस्त को नहीं, बल्कि 16 अगस्त 1947 को तिरंगा फहराया था।
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11 बार इंदिराजी ने फहराया झंडा : दूसरे नंबर पर पंडित नेहरू की पुत्री और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लाल किले पर 11 बार राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया। 1966 से 1977 के बीच उन्होंने 11 बार लगातार झंडा फहराया। इसके बाद उन्होंने 1980 से 1984 तक 5 बार राष्ट्रध्वज फहराया।

मनमोहन तीसरे नंबर पर : इंदिरा गांधी के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नंबर आता है। उन्होंने 10 बार लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा फहराया। सिंह 2 कार्यकाल तक प्रधानमंत्री रहे। वहीं, राजीव गांधी ने 5 बार लाल किले पर तिरंगा फहराया था। नरसिंह राव ने भी 5 बार लाल किले से झंडा फहराया।

इन्हें मिला 1 बार मौका : कम समय के लिए प्रधानमंत्री रहे चौधरी चरण सिंह, वीपी सिंह, एचडी देवेगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल, लाल बहादुर शास्त्री को ये सौभाग्य सिर्फ 1-1 बार ही मिला, जबकि मोरारजी देसाई ने 2 बार लाल किले से राष्ट्रध्वज फहराया।

ये नहीं चढ़ पाए लाल किले की प्राचीर : गुलजारी लाल नंदा और चंद्रशेखर, ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिन्हें एक बार भी लाल किले की दीवार से राष्ट्रध्वज फहराने का मौका नहीं मिला। गुलजारी लाल नंदा दो बार देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे थे।



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