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Last Updated : बुधवार, 10 जून 2026 (16:38 IST)

लाड़की बहन योजना में निकले हजारों ‘भैया’! बंगाल में भी लक्ष्मण बने “लक्ष्मी”, वेलफेयर पॉलिटिक्स का बड़ा खेल बेनकाब

‘बहन’ की योजना का भैया ने उठा लिया फायदा, 10 महीनों में अपात्रों को 21 करोड़ की राशि बंटी

freebies scheme
सरकारी योजनाओं में धांधली की खबर देश के कई राज्‍यों से आ रही हैं। कहीं बहनों के लिए बनाई गई योजनाओं में भैया बनकर फायदा उठा लिया गया तो कहीं लक्ष्‍मी योजना में लक्ष्‍मण बनकर फायदा उठा लिया गया। इतना ही नहीं जांच में यह भी सामने आया कि करीब 10 लाख आयकरदाताओं और 5 लाख सरकारी कर्मचारियों ने भी इन योजनाओं का गलत तरीके से फायदा उठा लिया।

जांच में सामने आ रहा है कि इन योजनाओं का फायदा उठाने के लिए लोग क्‍या क्‍या नहीं कर रहे हैं। अब सरकार जांच के बाद इन अपात्र लाभार्थियों से पैसा वापस लेने के साथ ही कार्रवाई भी करेगी। महाराष्ट्र से लेकर पश्चिम बंगाल तक महिलाओं के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं में हजारों पुरुषों के नाम सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।

ऑडिट में बड़ी संख्या में पुरुष पकड़े गए : मीडिया में सामने आईं रिपोर्टस के मुताबिक महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में सरकारी ऑडिट के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे पुरुष पकड़े गए हैं, जो महिलाओं के नाम पर चल रही योजनाओं का लाभ उठा रहे थे। यानी कहीं ‘लाड़की बहन’ बने भैयाजी के खाते में पैसे जा रहे थे, तो कहीं ‘लक्ष्मी भंडार’ में पुरुष ‘देवी’ बनकर सरकारी सहायता ले रहे थे।

महाराष्ट्र में भाई लोग’ बन गए ‘लाड़की बहन’ : महाराष्ट्र की भाजपा-नेतृत्व वाली सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाड़की बहन’ योजना की समीक्षा में पता चला कि कुल 2.47 करोड़ लाभार्थियों में करीब 81 लाख लोग अपात्र थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें 14,298 पुरुष भी शामिल थे, जो महिलाओं के लिए तय 1,500 मासिक सहायता का लाभ उठा रहे थे।

कैसे की गई योजनाओं में घुसपैठ : सरकारी आईटी विभाग की जांच में अंदेशा जताया गया कि फर्जी दस्तावेजों और गलत घोषणाओं के जरिए योजना में घुसपैठ की गई। सरकार का अनुमान है कि बीते 10 महीनों में ऐसे अपात्र लाभार्थियों को 21 करोड़ से ज्यादा की राशि बांट दी गई।

अब सरकार वापस लेगी पैसा : अब सरकार पैसा वापस लेने और फर्जी दस्तावेज लगाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सफाई देते हुए कहा कि शुरुआत में ‘स्व-सत्यापन’ की सुविधा इसलिए दी गई थी, क्योंकि कई लोगों के पास दस्तावेज जमा करने का समय नहीं था। लेकिन लगता है कि इस सुविधा का इस्तेमाल कुछ लोगों ने अपनी पहचान बदलने तक में कर लिया।

जांच में चौंकाने वाले खुलासे : इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि करीब 10 लाख आयकरदाता, 5 लाख सरकारी कर्मचारी और लाखों वाहन मालिक भी इस योजना का लाभ उठा रहे थे, जबकि वे पात्रता की शर्तों पर खरे नहीं उतरते थे। सत्यापन के बाद लाभार्थियों की संख्या 2.47 करोड़ से घटकर 1.7 करोड़ रह गई। अंदाजा लगाया जा सकता है योजनाओं में कितनी धांधली हो रही थी।

बंगाल में भी ‘लक्ष्मी’ निकले ‘लक्ष्मण’ : ऐसा ही मामला पश्चिम बंगाल में सामने आया, जहां महिलाओं के लिए चलाई जा रही ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना में हजारों पुरुष लाभार्थी पाए गए। बीजेपी नेता और अब बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि योजना के 2.2 करोड़ लाभार्थियों में लगभग 30 लाख ‘फर्जी’ हैं और इनमें 3 लाख से अधिक पुरुष शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ मुर्शिदाबाद के जंगीपुर ब्लॉक में ही करीब 4,000 पुरुष योजना का लाभ लेते पाए गए। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि इतना ही नहीं विधवाओं के लिए बनी योजना में भी पुरुषों के नाम दर्ज थे। पिछले हफ्ते नादिया जिले के धुबुलिया इलाके में 173 पुरुष लाभार्थियों की पहचान होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू की। रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा चुनाव से ठीक दो महीने पहले इन नामों को सूची में जोड़ा गया था। महाराष्ट्र और बंगाल के ये मामले सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि उस राजनीति की तस्वीर भी दिखाते हैं जहां चुनावी योजनाएं इतनी तेजी से लॉन्च होती हैं कि सत्यापन पीछे छूट जाता है और फर्जी लाभार्थी आगे निकल जाते हैं।
Edited By: Naveen R Rangiyal
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