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'दिल बहलाने को ग़ालिब...' पीएम मोदी के रिकॉर्ड पर भड़की कांग्रेस; नेहरू से तुलना वाली तस्वीर शेयर कर लगाया गंभीर आरोप
नरेंद्र मोदी अब भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने वाले नेता बन गए हैं। उन्होंने पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। जश्न के बीच भाजपा द्वारा नरेंद्र मोदी और जवाहर लाल नेहरू के बीच तुलना पर कांग्रेस भड़की गई। ALSO READ: नरेंद्र मोदी ने तोड़ा नेहरू का 77 साल पुराना रिकॉर्ड, बने भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री
दिल बहलाने को ग़ालिब ये ख़्याल अच्छा है
पार्टी ने एक्स पर अपने आधिकारिक अकाउंट पर जवाहर लाल नेहरू और नरेंद्र मोदी की एक फोटो पोस्ट की। इसमें नेहरू बहुत बड़े और मोदी काफी छोटे नजर आ रहे हैं। मोदी के ऊपर लिखा है कि मैंने नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया। फोटो के साथ पोस्ट में लिखा गया है- 'दिल बहलाने को ग़ालिब ये ख़्याल अच्छा है'।
दिल बहलाने को ग़ालिब ये ख़्याल अच्छा है pic.twitter.com/wxXIvNrARu
— Congress (@INCIndia) June 10, 2026
जयराम रमेश ने इस तरह की मोदी और नेहरू की तुलना
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त, 1947 को भारत के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने एक ऐसी असाधारण कैबिनेट का नेतृत्व किया, जैसी मिसालें दुनिया में बहुत कम देखने को मिलती हैं। अगले पांच वर्षों में आधुनिक भारत आकार लेने लगा। ALSO READ: इंटरनेट पर फिर छाया 'Melodi' का जादू! पीएम मोदी के ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर इटली की पीएम मेलोनी ने खास अंदाज में दी बधाई
560 से अधिक रियासतों का शांतिपूर्ण तरीके से भारतीय संघ में विलय किया गया। भारत के संविधान पर बहस हुई और उसे अपनाया गया। जमींदारी प्रथा समाप्त की गई। अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई। सिंचाई और बिजली से जुड़ी कई बहुउद्देशीय परियोजनाएं शुरू की गईं। विज्ञान और तकनीकी क्षमता के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया गया, जिसमें परमाणु ऊर्जा भी शामिल थी। भारत वैश्विक मामलों में एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरा।सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार सुनिश्चित करने के लिए 17 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं वाली मतदाता सूचियां तैयार की गईं और स्वतंत्र भारत के पहले आम चुनाव अक्टूबर 1951 से फरवरी 1952 के बीच कराए गए।
जवाहरलाल नेहरू 15 अगस्त, 1947 को भारत के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने एक ऐसी असाधारण कैबिनेट का नेतृत्व किया, जैसी मिसालें दुनिया में बहुत कम देखने को मिलती हैं। अगले पांच वर्षों में आधुनिक भारत आकार लेने लगा।
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) June 10, 2026
560 से अधिक रियासतों का शांतिपूर्ण तरीके से भारतीय संघ में विलय किया…
1947 से 1952 के बीच भारत की उपलब्धियों का यह रिकॉर्ड, जब नेहरू प्रधानमंत्री थे और जिसमें सरदार पटेल, डॉ. अंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सी. राजगोपालाचारी और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे दिग्गजों ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, अब पीएम मोदी द्वारा मिटाने की कोशिश की जा रही है। पीएम मोदी की नेहरू के प्रति एक अस्वाभाविक जुनून एवं सनक है। हो सकता है कि उन्होंने आज खुद घोषित और संदिग्ध रूप से गढ़े गए किसी मील के पत्थर को पार कर लिया हो, लेकिन वे भारत के गले का पत्थर हैं, क्योंकि MODI के अगुवाई में Murder of Democracy in India हो रहा है।
लोकतंत्र की वही मूल संस्थाएं-एक स्वतंत्र चुनाव आयोग और विश्वसनीय मतदाता सूची -आज खतरे में हैं। हमारी शैक्षणिक संस्थाओं के विनाश के जरिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मिटाया गया है, जैसा कि हाल ही में NEET-CBSE घोटालों से उजागर हुआ। अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण को निजीकरण और Not Found Suitable जैसे दुर्भावनापूर्ण औजारों के जरिए कमजोर किया गया है।
और जहां पंडित नेहरू ने 1952, 1957 और 1962 में भारी और निर्णायक बहुमत से जीत हासिल की, वहीं पीएम मोदी 2024 में काफी अंतर से साधारण बहुमत भी हासिल नहीं कर पाए। उन्हें भाजपा संसदीय दल को दरकिनार कर जल्दबाजी में NDA की बैठक बुलानी पड़ी, ताकि खुद को प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार कराया जा सके। 2024 निश्चित रूप से उनके लिए जनादेश नहीं था।
edited by : Nrapendra Gupta
