NRC नहीं तो जनगणना नहीं! मणिपुर में भारी बवाल, प्रदर्शनकारियों ने फूंके सीएम और गृह मंत्री के पुतले
Manipur NRC Demand Protest: मणिपुर में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट करने की मांग को लेकर बुलाया गया 48 घंटे का राज्यव्यापी बंद बुधवार को समाप्त हो गया। हालांकि, बंद खत्म होते ही घाटी वाले जिलों के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और तीव्र हो गए। बंद समर्थकों ने राजनेताओं के पुतले फूंके, विशाल रैलियां निकालीं और सड़कों पर जाम लगा दिया।
'नो एनआरसी, नो सेंसस' के लगे नारे
इम्फाल ईस्ट जिले के खुरई लामलोंग में बंद समर्थकों ने मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह और गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम के पुतले जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। पीटीआई के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने 'नो एनआरसी, नो सेंसस' (एनआरसी नहीं, तो जनगणना नहीं) के जोरदार नारे लगाए। उनकी मुख्य मांग है कि जब तक हिंसा के कारण आंतरिक रूप से विस्थापित हुए लोग अपने मूल स्थानों पर वापस नहीं लौट जाते और अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए एनआरसी लागू नहीं होती, तब तक राज्य में जनगणना की प्रक्रिया शुरू न की जाए। ALSO READ: दिल्ली के नरेला में रॉकेट लॉन्चरों को नष्ट करने की कार्रवाई, मणिपुर में 2 संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी से जुड़ा मामला
सड़कों पर चक्काजाम, प्रशिक्षण कार्यक्रम रद्द
इम्फाल वेस्ट जिले के सिंगजामेई में दर्जनों प्रदर्शनकारियों ने लगभग 2 किलोमीटर लंबी विरोध रैली निकाली। इसके अलावा इम्फाल वेस्ट, इम्फाल ईस्ट, बिष्णुपुर और थोउबल जिलों में कई स्थानों पर पत्थरों और बांस के खंभों से सड़कें अवरुद्ध कर दी गईं। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों की गाड़ियों समेत निजी वाहनों को रोक दिया और उन्हें वापस लौटने पर मजबूर कर दिया।
बढ़ते विरोध के चलते थोउबल जिले में जनगणना के सुपरवाइजरों, प्रगणकों और फील्ड ट्रेनरों के लिए आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा। इस स्थिति पर 'कौंसिल ऑफ टीचर्स एसोसिएशंस' (COTA), मणिपुर ने भी अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।
सरकारी कार्यालयों के बहिष्कार का ऐलान
'कैंपेन फॉर Just and Fair Delimitation' (JFD) के संयोजक जीतेंद्र निंगोंबा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की। उन्होंने बताया कि गुरुवार से संगठन राज्य और केंद्र सरकार के सभी कार्यालयों का पूर्ण बहिष्कार करेगा। हालांकि, जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पानी, बिजली और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवाओं को इस बहिष्कार से मुक्त रखा गया है।
घाटी के पांचों जिलों— इम्फाल ईस्ट, इम्फाल वेस्ट, थोउबल, काकचिंग और बिष्णुपुर— में व्यापारिक प्रतिष्ठान, बाजार, शिक्षण संस्थान और सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह ठप रहे।
आगे और बढ़ सकती है हलचल
एक तरफ तेंगनौपाल जिले में नागरिक समाज संगठनों ने डॉक्टरों के तबादले और पदस्थापना के आदेश को लागू न करने पर 24 अगस्त से राष्ट्रीय राजमार्ग पर 48 घंटे के पूर्ण बंद की चेतावनी दी है। वहीं दूसरी ओर, एनआरसी की मांग पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से महत्वपूर्ण चर्चा करने के लिए मणिपुर के राज्यपाल अजय के. भल्ला नई दिल्ली रवाना हो गए हैं।

