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2020 से सेमी हाईस्पीड युग में प्रवेश करेगी भारतीय रेलवे

रविवार, 22 जुलाई 2018 (17:11 IST)
नई दिल्ली। देश के चारों महानगरों को जोड़ने वाली 6 रेलवे लाइनों के 2020 तक सेमी हाईस्पीड ट्रेन के लिए संचालन के अनुकूल बन जाने की संभावना है। इसी के साथ समतल भू-भाग पर गाड़ियों की गति बढ़ाने के लिए अन्य सभी रेल लाइनों को कम से कम 130 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पर चलने के अनुकूल बनाया जाएगा।
 
 
रेलवे बोर्ड ने गत डेढ़ साल से 'मिशन रफ्तार' के तहत कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं जिन पर तेजी से काम हो रहा है। रेलवे बोर्ड ने नई बनने वाली सभी रेलवे लाइनों पर लेवल क्रॉसिंग नहीं बनाने का फैसला किया है। अगर आवश्यकता होगी तो उस बारे में कोई भी फैसला रेलवे बोर्ड के स्तर पर लिया जाएगा।
 
बोर्ड के एक परिपत्र में सभी जोनल महाप्रबंधकों से कहा गया है कि पर्वतीय क्षेत्रों को छोड़कर नए सेक्शनों पर गाड़ियों की गति 160 किलोमीटर प्रतिघंटा सुनिश्चित करने के लिए लाइन में कहीं भी 1 डिग्री से अधिक का घुमाव नहीं होना चाहिए।
 
'मिशन रफ्तार' की नीति के अनुसार ग्रांड कॉर्ड की 4 लाइनों- दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-कोलकाता, कोलकाता-चेन्नई और चेन्नई-मुंबई तथा उसकी 2 विकर्ण लाइनों- दिल्ली-चेन्नई और कोलकाता-मुंबई मार्ग को 160 किलोमीटर की गति से गाड़ियों के संचालन के अनुरूप उन्नत करने तथा अन्य सभी गैरपर्वतीय लाइनों को 130 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से गाड़ियों के परिचालन के अनुरूप बनाने का निर्णय लिया गया है। इस बारे में समयसीमा पूरी कार्ययोजना लगभग तैयार हो चुकी है और उसका कार्यान्वयन कई स्थानों पर शुरू होने वाला है।
 
बोर्ड ने इसके अलावा ग्रांड कॉर्ड और उसकी 2 विकर्ण लाइनों पर सभी मालगाड़ियों की गति 75 किलोमीटर प्रतिघंटा से बढ़ाकर 100 किलोमीटर तक करने का निर्णय लिया है। सूत्रों का कहना है कि मालगाड़ियों की गति बढ़ने से ट्रैक जल्दी खाली होंगे और यात्री गाड़ियों की गति बनाए रखने या बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे उनकी समयबद्धता भी सुनिश्चित की जा सकेगी। 
 
'मिशन रफ्तार' की नीति के अनुसार ग्रांड कॉर्ड और उसकी 2 विकर्ण लाइनों पर मालगाड़ियों की गति बढ़ाने के लिए पॉवर के लिए 356 अतिरिक्त इंजनों की दरकार है और राजधानी आदि प्रीमियम गाड़ियों की गति बढ़ाने के लिए 131 अतिरिक्त इंजनों की जरूरत है, इसके साथ ही इन मार्गों पर चलने वाली पैसेंजर गाड़ियों के रैक को डेमू/मेमू रैक से बदला जा रहा है।
 
सूत्रों के अनुसार ग्रांड कॉर्ड और उसकी 2 विकर्ण लाइनों पर वजन में गाड़ियों के हल्के कोच वाले रैक तथा नए ट्रेनसेट लाने की भी सिफारिश की गई है। उसी के अनुरूप चेन्नई में बन रहे नए ट्रेन सेट ट्रेन-18 और ट्रेन-20 को इन्हीं मार्गों पर चलाने की योजना है। सूत्रों के मुताबिक नए इंजनों की खरीद की योजना बनाई गई है। बिहार के मढ़ोहरा एवं मधेपुरा के कारखाने में बनने वाले उच्च क्षमता वाले इंजनों को इसके लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
 
सूत्रों ने बताया कि ग्रांड कॉर्ड और उसकी 2 विकर्ण लाइनों पर लाइनों का संरक्षा कार्य बहुत द्रुतगति से चल रहा है और इसी साल पटरियों को पूरी तरह से बदल दिए जाने की संभावना है। नई पटरियों, सुरक्षित घुमाव और बड़े हिस्से में तीसरी एवं चौथी लाइनों के बिछाने के साथ ही गाड़ियों की गति बढ़ाना संभव हो जाएगा।
 
पूर्वी एवं पश्चिमी मालवहन गलियारे (डीएफसी) के भी 2020 के अंत तक चालू होने की उम्मीद है। इससे भारतीय रेलवे की क्षमता अगले 40-50 साल की जरूरत के हिसाब से बढ़ जाएगी और गति के मामले में भी भारतीय रेलवे का सेमी हाईस्पीड युग आरंभ होगा। (वार्ता)

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