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सरकार के लिए थोड़ी राहत, खुदरा महंगाई दर में गिरावट, पर RBI के दायरे से अब भी बाहर

Updated: मंगलवार, 12 जुलाई 2022 (23:27 IST)
नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर स्थिति मिली-जुली रही। मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एक तरफ जहां जून में खुदरा महंगाई मामूली घटकर 7.01 प्रतिशत रही, वहीं औद्योगिक उत्पादन मई में 19.6 प्रतिशत बढ़ा, जो 12 महीने का उच्चस्तर है।
 
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में कमी के बावजूद यह लगातार 6ठे महीने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संतोषजनक स्तर से ऊपर बनी हुई है। आरबीआई को खुदरा मुद्रास्फीति 2 से 6 प्रतिशत के बीच रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है। इससे आने वाले दिनों में केंद्रीय बैंक प्रमुख नीतिगत दर में वृद्धि कर सकता है। मंगलवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस साल मई में खुदरा महंगाई 7.04 प्रतिशत थी।
 
औद्योगिक उत्पादन मई में 19.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा। यह 12 महीने का उच्चस्तर है। इससे पिछले महीने इसमें 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। आंकड़ों के अनुसार सभी औद्योगिक क्षेत्रों में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। टिकाऊ उपभोक्ता सामान में सबसे अधिक 58.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उसके बाद बाद पूंजीगत वस्तुओं का स्थान रहा। बिजली उत्पादन में सालाना आधार पर मई में 23.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं विनिर्माण क्षेत्र में 20.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 12 महीने का उच्चस्तर है। आईआईपी में विनिर्माण क्षेत्र का भारांश सबसे अधिक है।
 
मुद्रास्फीति के बारे में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 1-1 वस्तु की कीमतों की निगरानी और महंगाई पर नियंत्रण के लिए 'सटीक उपायों' को जारी रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक का अनुमान है कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही की शुरुआत तक केंद्रीय बैंक और सरकार दोनों को ही सचेत रहना होगा।
 
सीतारमण ने कहा कि हमें कीमतों को लेकर सजग एवं सतर्क बने रहना होगा। मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए सटीक उपायों को जारी रखने की जरूरत है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति औसतन 7.3 प्रतिशत रही। यह रिजर्व बैंक के 7.5 प्रतिशत के अनुमान से कुछ कम है।
 
मुख्य (कोर) मुद्रास्फीति 3 महीने बाद 6 प्रतिशत से नीचे 5.95 प्रतिशत रही। मुख्य रूप से तेल और वसा के दाम में कमी से खाद्य महंगाई में मामूली गिरावट आई और जून में 7.75 प्रतिशत रही, जो मई 2022 में 7.97 प्रतिशत थी। मुद्रास्फीति में खाद्य वस्तुओं की कीमतों की हिस्सेदारी करीब आधी है। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर संकट से आपूर्ति संबंधी समस्याओं और कच्चे तेल के दाम में वृद्धि के कारण इसके ऊंचे बने रहने की आशंका है।
 
खाद्य पदार्थों की 12 उपश्रेणियों में 10 में जून महीने में मासिक आधार पर वृद्धि हुई है जबकि खाद्य तेल तथा फलों के दाम में कमी आई।  एक्यूट रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य विश्लेषण अधिकारी सुमन चौधरी ने कहा कि मानसून के गति पकड़ने के साथ चालू वित्त वर्ष में खाद्य मुद्रास्फीति सीमित दायरे में रहनी चाहिए।
 
उन्होंने कहा कि रुपए के मूल्य में गिरावट ने आयातित मुद्रास्फीति के जोखिम को बढ़ा दिया है, लेकिन सरकार की तरफ से उठाए गए कुछ कदमों से ऐसे जोखिमों को दूर करने में मदद मिल सकती है। इन उपायों में रूस से अपेक्षाकृत कम दाम पर कच्चे तेल के आयात में वृद्धि और विदेशी मुद्रा के संरक्षण के लिए आरबीआई का उठाया गया कदम शामिल हैं।
 
इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि जुलाई में महंगाई दर जून के मुकाबले 0.2 से 0.3 प्रतिशत अधिक रह सकती है। इससे आरबीआई अगस्त में मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर 0.25 प्रतिशत से 0.35 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।
 
मोतीलाल ओसवाल के मुख्य अर्थशास्त्री निखिल गुप्ता ने कहा कि अगले महीने नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हमारा अनुमान है कि सकल मुद्रास्फीति 2022-23 की दूसरी तिमाही में करीब सात प्रतिशत रहेगी जबकि चौथी तिमाही में 6.5 प्रतिशत पर आ सकती है। मार्च 2023 में यह 6 प्रतिशत से नीचे आ सकती है। गुप्ता ने कहा कि इसके उलट औद्योगिक उत्पादन सूचकांक जून में दहाई अंक में वृद्धि कर सकता है। दूसरी तिमाही में इसमें तेजी से नरमी आ सकती है।

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