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गेटवे ऑफ इंडिया की सतह पर दरार, संसद में क्या बोली सरकार...
नई दिल्ली। केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि मुंबई में गेटवे ऑफ इंडिया (Gate way of India) की सतह पर कुछ दरारें पाई गई, लेकिन समग्र संरचना बेहतर स्थिति में है।
उनसे पूछा गया था कि क्या हाल में गेटवे ऑफ इंडिया के संरचनात्मक ऑडिट में सामने के हिस्से में दरार का पता चला है। उन्होंने कहा कि मुंबई में स्थित गेटवे ऑफ इंडिया एक केंद्रीय संरक्षित स्मारक नहीं है। यह पुरातत्व और संग्रहालय विभाग, महाराष्ट्र सरकार के संरक्षण में है। रेड्डी ने कहा कि निरीक्षण के दौरान सतह पर कुछ दरारें पाई गईं। समग्र संरचना हालांकि बेहतर स्थिति में पाई गई।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के पुरातत्व विभाग ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा था कि इमारत समय के साथ-साथ कमजोर होती जा रही है। समंदर के तूफान की मार झेल पाने में यह इमारत सक्षम नहीं है। विभाग ने महाराष्ट्र सरकार से गेटवे ऑफ इंडिया की मरम्मत के लिए आग्रह किया था।
महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने आश्वासन दिलाया कि गेटवे ऑफ इंडिया की मरम्मत के लिए करीब 8 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा गया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही यह प्रस्ताव पास हो जाएगा, इमारत को ठीक करने का काम बहुत जल्द शुरू कर दिया जाएगा।
गेटवे ऑफ इंडिया का इतिहास : इंडो-सरसेनिक शैली में बने गेटवे ऑफ इंडिया को 20वीं शताब्दी में मुंबई में समंदर के किनारे बनाया गया था। गेटवे ऑफ इंडिया की यह इमारत सन् 1924 में बनकर तैयार हो गई थी। माना जाता है कि इस इमारत को किंग जॉर्ज पंचम और महारानी मैरी की भारत यात्रा के दौरान बनाया गया था। इस इमारत को मुंबई का ताज महल भी कहा जाता है। यहां तक कि अंग्रेजों की आखरी टुकड़ी भी भारत छोड़कर गेटवे ऑफ इंडिया से ही निकली थी।
