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Last Updated: शनिवार, 22 अगस्त 2020 (13:55 IST)

Virus Mutations: क्‍या रूप बदलते वायरस को ‘किल’ करने में सफल होगा कोविड का टीका?

दुनियाभर में कोरोना को लेकर वैक्‍सीन की खोज चल रही है, ऐसे में इधर कोरोना द्वारा अपना रूप बदलना चिंता का विषय बन रहा है। दरअसल वैज्ञानिक कोरोना को बेअसर करने का टीका बना रहे हैं, इधर कोरोना वायरस म्यूटेशन से अपना नया वर्जन बना रहा है तो क्‍या ऐसे में वह टीका नए वर्जन वाले कोरोना को बेअसर कर सकेगा।


कोरोना ने पूरी दुनिया में लाखों लोगों की जान ले ली। यह वो वायरस है जो चीन के वुहान से निकला था। लेकिन अब यह सवाल है कि जो वायरस वुहान से निकला था क्‍या वही वायरस पूरी दुनिया में फैला है। शायद ऐसा नहीं है।

ऐसा इसलिए क्योंकि दूसरे वायरस की तरह ही सार्स-कोव-2 के पास भी अलग-अलग वर्जन में बदलने की क्षमता है। वायरस ऐसा म्यूटेशन के कारण कर पाते हैं। मलेशिया में कोरोना वायरस के म्यूटेशन से पैदा हुआ एक खास तरह का स्ट्रेन चिंता का नया कारण बन गया है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर कोरोना वायरस के ये स्ट्रेन कैसे पैदा हो रहे हैं और क्या नए-नए स्ट्रेन से कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए विकसित किए जा रहे टीके पर कोई असर होगा?

मलेशिया में फैले कोरोना वायरस ज्यादातर जिस स्ट्रेन का है, वो सबसे पहले फरवरी महीने में यूरोप में पाया गया था। D614G के नाम से जाना जाने वाला यह स्ट्रेन ही अब दुनियाभर में व्यापक रूप से पाया जा रहा है। आसान शब्दों में कहा जाए तो यह स्ट्रेन डी और जी नाम के अमीनो एसिड्स के बीच अदला-बदली करता है। वायरस के स्पाइक प्रोटीन के कोड में इसका पोजिशन 614 है। चूंकि यह डी से जी के बीच अदला-बदली करता है, इसलिए इसका नाम डी614जी पड़ा है। प्रोटीन के बिल्डिंग ब्लॉक्स अमीनो एसिड्स होते हैं। वुहान में शुरुआती दिनों में कोरोना वायरस के जो नमूने इकट्ठा किए गए वो डी वरायटी के थे।

रिपोर्ट के मुताबिक मार्च तक 90 प्रत‍िशत से ज्यादा मरीजों को इसी वैरायटी के कोरोना वायरस ने संक्रमित किया था लेकिन उसके बाद जी वैरायटी के वायरस का दबदबा बढ़ने लगा। अब जी वैरायटी का कोरोना वायरस दुनिया के 97 प्रत‍िशत संक्रमितों में पाया जा रहा है।

रिसर्च पेपर में कहा गया है कि कोरोना वायरस के अब तक कम-से-कम छह स्ट्रेन पकड़ में आ चुके हैं। अभी जी स्ट्रेन का दबदबा है और पहले सामने आए स्ट्रेन अब खत्म हो रहे हैं। दो स्ट्रेनों को अलग-अलग प्रकार का तब माना जाता है जब वो इंसानों के इम्यून सिस्टम को अलग-अलग तरह से प्रभावित करता है या उनके संक्रमण फैलाने का तरीका अलग-अलग होता है।

म्यूटेशन का मतलब है कि वायरस अपनी कॉपी पैदा करता है। लेकिन नई कॉपी ऑरिजनल वायरस जैसा ही हो, इसकी गारंटी नहीं होती है। कई बार नई पैदा हुई कॉपी पहले के वायरस के मुकाबले कम प्रभावी होती है। ऐसे में स्ट्रेन तुरंत मर जाता है, लेकिन कुछ म्यूटेशन या वायरस की कॉपी संक्रमण की रफ्तार और तेज कर देती है।

कई शोधकर्ताओं का मानना है कि सार्स-कोव-2 के स्पाइक प्रोटीन में डी614जी म्यूटेशन की मौजूदगी के कारण वायरस तेजी से संक्रमण फैलाने में सक्षम हो गया है। हालांकि कई अन्य विशेषज्ञ कहते हैं कि इस स्ट्रेन के डॉमिनेंट होने की कई वजहें हो सकती हैं। मसलन, यह पता चला है कि अमेरिका में सार्स-कोव-2 के जो वर्जन पाए गए, वो सभी यूरोप में पैदा हुए थे। ऐसे में यह सवाल है कि क्‍या यह नया टीका बदले हुए वायरस के लिए कारगार या उसे बेअसर कर सकेगा।
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