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Bhima Koregaon case: 83 वर्षीय फादर स्टेन स्वामी 23 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में, 8 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र

Updated: शनिवार, 10 अक्टूबर 2020 (02:26 IST)
मुंबई। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ((NIA) ने 1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव (Bhima Koregaon) में भीड़ को कथित तौर पर हिंसा के लिए उकसाने के मामले में शुक्रवार को 83 वर्षीय मानवाधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी, सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा और दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर हनी बाबू समेत 8 लोगों के खिलाफ एक आरोप पत्र दाखिल कर दिया। स्टेन स्वामी 23 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में रहेंगे। स्टेन स्वामी को गुरुवार को रांची से उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था। 
 
क्या है पूरा मामला : NIA की प्रवक्ता एवं पुलिस उप महानिरीक्षक सोनिया नारंग ने कहा कि आरोप-पत्र यहां एक अदालत के समक्ष दाखिल किया गया। जांच के दौरान 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया। यह मामला 1 जनवरी 2018 को पुणे के निकट कोरेगांव की जंग की 200वीं वर्षगांठ के जश्न के बाद हिंसा भड़कने से संबंधित है, जिसमें 1 व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे।
 
स्टेन स्वामी से काफी चीजें बरामद हुई थी : जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि स्टेन स्वामी ने एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए एक सहयोगी के मार्फत धन भी प्राप्त किया था। अधिकारियों ने दावा किया कि इसके अलावा वह भाकपा (माओवादी) के मुखौटा संगठन ‘परसेक्युटेड प्रीजनर्स सोलीडैरिटी कमेटी' (पीपीएससी) के संयोजक भी हैं। उन्होंने बताया कि स्टेन स्वामी के पास से भाकपा (माओवादी) से जुड़े साहित्य, दुष्प्रचार सामग्री तथा संचार से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए थे, जो समूह के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए थे।
 
प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े भी आरोपी : NIA ने अन्य जिन लोगों को खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है, उनमें गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैंनेजमेंट के प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े, भीमा-कोरेगांव शौर्य दिन प्रेरणा अभियान समूह की कार्यकर्ता ज्योति जगताप, सागर गोरखे और रमेश गाइचोर शामिल हैं। एनआईए ने आरोप पत्र में मिलिंद तेलतुंबड़े को भी आरोपी बताया है। वह अभी फरार हैं। एनआईए ने इस साल 24 जनवरी को इस मामले की जांच अपने हाथों में ली है।
 
माओवादी गतिविधियों में संलिप्त थे : NIA अधिकारियों ने कहा है कि जांच से यह पता चला है कि स्टेन स्वामी माओवादी गतिविधियों में संलिप्त थे। एनआईए ने आरोप लगाया है कि वह समूह की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, अरुण फरेरा, वर्णन गोंजाल्वेस, हनी बाबू, शोमा सेन, महेश राउत, वरवर राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा और आनंद तेलतुम्बदे के संपर्क में थे।

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