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अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला, आस्था के केंद्र पर 'चंदा चोरी' का साया, SIT जांच से मचा हड़कंप

Updated: सोमवार, 15 जून 2026 (14:20 IST)
Ayodhya Ram Mandir donation scam: हिन्दू आस्था के सबसे बड़े केंद्र, प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। भक्तों द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे में 8 करोड़ से अधिक के कथित गबन का खुलासा होने के बाद अयोध्या से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मच गया है। जहां एक तरफ राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ राम मंदिर ट्रस्ट के जिम्मेदार अधिकारियों और पदाधिकारियों का 'मौन' कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

5 कर्मचारी गिरफ्तार, 3 करोड़ के करीब कैश बरामद

सूत्रों के मुताबिक, दान राशि की गिनती से जुड़े पांच कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसियां अब इनके जरिए बड़े राज उगलवाने में जुटी हैं। आरोपियों के नाम लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करणे और रमाशंकर हैं। आरोपियों की निशानदेही पर अब तक लगभग 2.98 करोड़ नकद बरामद किए जाने का दावा किया जा रहा है। आरोपी अवनीश के बैंक खाते से 5 लाख रुपए की संदिग्ध राशि व जेवरात मिले हैं, जबकि रुदौली के मीनापुर में आरोपी लवकुश के घर से 10-12 लाख कैश बरामद हुआ है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर के उप-मंदिरों में दर्शन शुरू, ऑनलाइन पास की मची होड़

रहस्यमयी 'टिड्डू' कौन?

इस पूरे प्रकरण में 'टिड्डू' नाम के एक शख्स की चर्चा सरगर्म है। दावा किया जा रहा है कि वह ट्रस्ट के एक बेहद प्रभावशाली व्यक्ति का करीबी है और सालों से मंदिर के कार्यों में उसका दखल रहा है। क्या यही इस खेल का असली सूत्रधार है? इसकी जांच जारी है।


इस घोटाले पर किसने क्या कहा?

भाजपा के फायरब्रांड नेता विनय कटियार ने कहा कि हमने मंदिर बनाने का काम शुरू किया था और मंदिर लगभग बनकर तैयार है। अब हम वहां नहीं जाते। मैंने संतों की बात सुनी है और वे सही कह रहे हैं। प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि जांच की जा रही है।
 
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने चंदा घोटाले के सवालों पर पूरी तरह से दूरी बना ली है। अयोध्या पहुंचे मिश्र ने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में सिर्फ इतना कहा कि मेरी जिम्मेदारी केवल निर्माण कार्यों की निगरानी करना है। मैं केवल निर्माण देखता हूं और कुछ नहीं। ALSO READ: अयोध्या में बनेगा भव्य लव-कुश पार्क, 17.72 करोड़ की लागत से 'कचरे से कला' थीम पर होगा विकास
 
महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने पूरे सिस्टम पर तीखा हमला बोला और कहा कि जब जांच करने वाले खुद ही बेईमान हैं तो वे क्या जांच करेंगे? इसकी वास्तविक जांच तो भगवान ही करेंगे। जो कभी साइकिल पर चलते थे, वे आज बड़ी-बड़ी गाड़ियों और आलीशान भवनों में घूम रहे हैं। कोई भी दूध का धुला नहीं है, जो जैसा करेगा वैसा भरेगा।
 
यूपी सरकार के खाद्य एवं रसद विभाग के मंत्री मनोज कुमार पांडेय मामले को राजनीतिक रंग लेता देख विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे पर सवाल उठाने वाले पहले अपना इतिहास देखें। जांच पूरी होने दीजिए, दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ जाएगा।

सवाल, जो जनता पूछ रही है

इस पूरे मामले में आगे क्या?

सरकार ने SIT को 7 दिन में प्रारंभिक और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट सौंपने का कड़ा निर्देश दिया है। फिलहाल पुलिस की विशेष टीम रिकॉर्ड्स, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन के दस्तावेज़ों को खंगाल रही है। इस हाई-प्रोफाइल टीम में लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत (IAS), आईजी रेंज किरण एस (IPS) और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार शामिल हैं। आशंका जताई जा रही है कि जांच बढ़ने पर गबन का यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है। 

कैसे सामने आया पूरा मामला?

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में सामने आया 'चंदा घोटाला' या 'दान चोरी' मामला इस समय देश के सबसे बड़े विवादों में से एक बन गया है। इस पूरे मामले की शुरुआत मंदिर के दानपात्रों (Donation Boxes) से चढ़ावे की हेरफेर से हुई, जो अब एक बड़े राजनीतिक और कानूनी मोड़ पर पहुंच चुकी है।
 
जून 2026 के पहले सप्ताह में अयोध्या के पूर्व सपा विधायक पवन पांडे और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए आरोप लगाया कि राम मंदिर के दानपात्रों से 7 से 8 करोड़ रुपए का चढ़ावा (चंदा) गायब है। विपक्ष ने इसे सनातन समाज की आस्था के साथ खिलवाड़ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने और न्यायिक जांच कराने की मांग की। आम आदमी पार्टी और शिवसेना (UBT) ने भी इस पर सरकार को घेरा।

ट्रस्ट की शुरुआती प्रतिक्रिया

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य पदाधिकारियों ने इन आरोपों को अफवाह बताते हुए खारिज कर दिया। उनका कहना था कि रूटीन ऑडिट चल रहा है और कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।  लेकिन, बढ़ते जन आक्रोश और मीडिया स्क्रूटनी के बीच ट्रस्ट ने आंतरिक स्तर पर जांच शुरू की। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अधिकारियों और ट्रस्ट के सदस्यों ने जब रिकॉर्ड्स और लेजर बैलेंस का मिलान किया, तो कलेक्शन और बैंक खाते की राशि में बड़ा अंतर पाया गया। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
लेखक के बारे में
संदीप श्रीवास्तव
संदीप श्रीवास्तव करीब 25 वर्ष से ज्यादा समय से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वेबदुनिया के लिए उत्तर प्रदेश में स्ट्रिंगर के रूप में कार्य करते हैं। .... और पढ़ें

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