अग्नि मिसाइल परीक्षण टालने का कलाम पर था दबाव?

नई दिल्ली| पुनः संशोधित सोमवार, 19 अक्टूबर 2015 (13:26 IST)
नई दिल्ली। अग्नि मिसाइल का जब वर्ष 1989 में परीक्षण किया जा रहा था उससे महज कुछ घंटे पहले डॉ. को भारत के एक शीर्ष सरकारी अधिकारी से हॉटलाइन फोन कॉल मिला। इसमें अमेरिका और नाटो देशों की तरफ से मिसाइल प्रक्षेपण टालने के लिए जबर्दस्त दबाव बनाया जा रहा था।
> हॉटलाइन फोन कॉल पर दूसरी ओर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कैबिनेट सचिव थे। इस बात का जिक्र डॉ. कलाम की लिखी आखिरी किताब 'एड्वांटेज इंडिया : फ्रॉम चैलेंज टू अपॉर्च्युनिटी' में किया गया है। यह शीघ्र ही बाजार में सुलभ होगी।> किताब में कलाम ने जिक्र किया कि प्रक्षेपण के कुछ ही घंटे पहले तड़के ‍3 बजे एक हॉटलाइन फोन आया जिसका कोई उचित अर्थ नहीं था। टीएन शेषन ने पूछा था कि अग्नि को लेकर हमारा कार्यक्रम किस स्‍थिति में है?

हार्पर कोलिंस इंडिया द्वारा प्रकाशित किताब में आगे लिखा गया है कि फिर मेरे जवाब का इंतजार किए बिना उन्होंने कहा कि अमेरिका और नाटो की तरफ से मिसाइल परीक्षण में देरी को लेकर हम जबर्दस्त दबाव में हैं। तभी उन्होंने तुरंत पहला सवाल दागते कहा कि अग्नि को लेकर हमारी क्या प्रगति है? उनके लिए इस सवाल का जवाब देना बहुत कठिन था। गहरी सांस लेकर उन्होंने कहा कि ओके।

किताब में आगे लिखा गया है कि मैंने सभी बातों का आकलन कर कहा कि सर मिसाइल उस बिंदु पर है, जहां से वह वापस नहीं लौट सकती तथा हम परीक्षण ट्रैक उसे वापस नहीं ला सकते हैं। अब काफी देर हो चुकी है।

डॉ. कलाम ने लिखा है कि मुझे मेरे बॉस तथा शेषन से सवालों की झड़ी और बहस की उम्मीद थी, पर आश्चर्य की बात यह थी कि शेषन ने कहा था- ओके और उसके बाद उन्होंने गहरी सांस लेते हुए कहा- आगे बढ़ो।

 

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