देश के बारे में गलत बोलने वाले का 'हीरो' जैसा स्वागत क्यों : अनुपम खेर

पुनः संशोधित शुक्रवार, 18 मार्च 2016 (23:12 IST)
नई दिल्ली। राजद्रोह मामले को लेकर जेएनयू छात्रों की आलोचना कर चुके बॉलीवुड अभिनेता ने आज सवाल किया कि देश के बारे में ‘गलत बोलने’ वाले व्यक्ति का इस तरह से स्वागत कैसे किया जा सकता है, जैसे वह ओलंपिक पदक विजेता हो। उन्होंने कहा कि देश में विरोध करना एक फैशन बना गया है। 
खेर अपनी ‘बुद्धा इन ए ट्रैफिक जैम’ के प्रदर्शन के लिए जेएनयू परिसर में आये थे। उन्होंने के संदर्भ में कहा, ‘वह जमानत पर है, वह कोई ओलंपिक पदक लेकर वापस नहीं आया है कि उसका इतना भव्य स्वागत किया जाए।’ 
 
उन्होंने कन्हैया का नाम लिये बिना कहा, ‘जो देश के बारे में गलत बोलता है, उसका एक नायक के तौर पर स्वागत कैसे किया जा सकता है? क्या उसे ओलंपिक पदक मिला है? वह जमानत पर आया है। वह सचिन, साइना या हनुमनथप्पा नहीं है।’ 
 
उन्होंने सवाल किया, ‘वह कहता है कि वह एक गरीब परिवार से है लेकिन मेरा सवाल है कि तुमने उनकी गरीबी समाप्त करने के लिए क्या योगदान किया? जब मुझे 200 रुपए की छात्रवृत्ति मिली मेरे पिता का वेतन 90 रुपए था और तब मैंने 110 रुपए अपने परिवार पर खर्च कर दिए थे। तुमने क्या किया।’
 
खेर की फिल्म के प्रदर्शन के दौरान वाम संबद्ध समूहों ने नारेबाजी की और ‘थम्स डाउन’ का इशारा किया। खेर ने इससे पहले आरोप लगाया था कि जेएनयू ने विश्वविद्यालय परिसर में वर्तमान माहौल को देखते हुए उनकी फिल्म को प्रदर्शित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इस आरोप से जेएनयू प्रशासन ने इनकार किया था। 
 
खेर ने कन्हैया पर हमला करते हुए सवाल किया, ‘तुम उन सभी चीजों के बारे में बात करते हो जो तुम्हारे अनुसार देश में गलत है। यद्यपि तुमने अपनी आलोचनाओं के अलावा देश के प्रति क्या योगदान दिया।’ उन्होंने कहा, ‘चलो इस बारे में बात नहीं करते जो देश में नहीं हो रहा बल्कि उस बारे में बात करते हैं जो देश में हो रहा है। तुम यहां पर अध्ययन करने के लिए आए हो, राजनीति करने के लिए नहीं और यदि तुम ये कर भी रहे हो तो देश के खिलाफ कोई राजनीति मत करो।’ 
 
उन्होंने कहा, ‘मैंने किसी को यह कहते हुए भी सुना कि वह भारत में आजादी चाहता है, भारत से नहीं। यदि ये देश तुम्हारा घर है तो इसमें और इससे आजादी में क्या फर्क है।’ खेर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘यह वर्षों बाद हुआ है कि हमें इतना अच्छा प्रधानमंत्री मिला है। हम इसके साथ ही आप सभी को क्रांति एवं देशभक्ति के मार्ग पर वापस लाने का प्रयास कर रहे हैं।’ 
 
उन्होंने स्वयं को एक सच्चा भारतीय बताते हुए कहा, ‘मेरे भीतर का भारत हमेशा जिंदा रहेगा। मैं बूढ़ा नहीं हूं। मैं अपने देश जैसा हूं जो समय के साथ युवा होगा।’ (भाषा)



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