'संघ' में भी होगा दायित्वों का बदलाव

-अनिल जैन

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के पुनर्गठित संसदीय बोर्ड से अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की रुखसती के साथ ही पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हो गई है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पीढ़ीगत बदलाव की इस प्रक्रिया की आंच से संघ भी अछूता नहीं रहेगा। इस सिलसिले में आने वाले कुछ ही दिनों में उन लोगों को भी बदला जाएगा जो अभी भाजपा और संघ के बीच समन्वय का जिम्मा संभाले हुए हैं या एक तरह से संघ के प्रतिनिधि के तौर भाजपा का काम देख रहे हैं। फिलहाल भाजपा में संगठन महामंत्री की हैसियत से रामलाल पार्टी और संघ के बीच समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में संघ से भाजपा में भेजे गए शिव प्रकाश को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा एक बड़ा बदलाव के तहत सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी की जगह दूसरे सह सरकार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल को भाजपा का मार्गदर्शक बनाया जा सकता है।

सोनी लंबे समय से संघ और भाजपा के बीच समन्वय का काम कर रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से उनकी भूमिका को लेकर कई विवाद खड़े हो गए हैं। खासकर पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी उनसे बेहद खफा थे। इसी वजह से लोकसभा चुनाव से पहले भी उन्हें उनके मौजूदा दायित्व से मुक्त करने की चर्चा काफी तेजी से चली थी लेकिन फिर चुनाव तक इस बदलाव को टाल दिया गया था।
अब उन्हें हटाए जाने का ऐलान अक्टूबर में झारखंड में संघ की होने वाली बैठक के बाद हो सकता है। कृष्ण गोपाल अपनी संगठन क्षमता के लिए जाने जाते हैं। 2014 के आम चुनाव में उन्हें जो जिम्मेदारी दी गई थी, उसमें स्वयंसेवकों को घर-घर जाकर प्रचार करने का प्रशिक्षण देना शामिल था।

सूत्रों का कहना है कि इन बदलावों के मायने यह है कि नए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री सिर्फ पार्टी संगठन में ही अपने मनपसंद लोग नहीं चाहते हैं, बल्कि संघ के जिन लोगों के साथ वे काम करना चाहते हैं, उनका भी चयन वे खुद ही कर रहे हैं। राम माधव और शिव प्रकाश उन्हीं की पसंद के चलते भाजपा में भेजे गए हैं।
शिव प्रकाश लोकसभा चुनाव के दौरान तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय प्रचारक का दायित्व संभाल रहे थे और उसी दौरान अमित शाह से उनके संबंध बने थे। उन्हें जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने है, उनमें से किसी एक की जिम्मेदारी दी जा सकती है या फिर रामलाल की जगह संगठन महामंत्री बनाए जा सकते है। फिलहाल वे सह-संगठन महामंत्री की हैसियत से रामलाल के सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं।



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