कश्मीर और तेलंगाना भारत का हिस्सा नहीं हैं : के. कविता

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कविता ने अखबार से कहा कि उनका मानना है कि जम्मू कश्मीर और तेलंगाना भारत के हिस्से ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्से हमारे नहीं हैं। आजादी मिलने के बाद हमने जबरन अपना अधिकार जमाया था और इसे अपने में मर्ज कर लिया। हमें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का नए सिरे से गठन करना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।

सनद रहे कि हाल ही आंध्रप्रदेश से अलग होकर तेलंगाना भारत का 29वां राज्य घोषित किया गया है और इसके पहले मुख्यमंत्री हैं। मुख्यमंत्री की बेटी के. कविता का दिल्ली में इस तरह का बयान देना किसी भी भारतीय के गले नहीं उतर रहा है।

कविता के मीडिया को दिए गए इस विवादास्पद बयान पर कांग्रेस ने घोर आपत्ति जताते हुए को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस मानती है कि कविता ने भारत की अखंडता और संप्रभुता पर सीधे हमला किया है।

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अखंड हिस्सा है और हमेशा रहेगा। चूंकि कविता चुनी हुई प्रतिनिधि हैं, इसलिए उनके दिए हुए किसी भी बयान से विदेशी नेताओं के सामने गलत उदाहरण पेश होता है, लिहाजा उन्हें इस तरह के बयानों से बचना चाहिए।

इससे पहले तेलंगाना सांसद के. कविता के कश्मीर के संबंध में दिए गए विवादास्पद बयान पर किसी तरह की प्रतिक्रिया से बचते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि इस पर संसद ही बात करे तो बेहतर है।

असल में यह बड़ी अजीबो-गरीब स्थिति है...जिसका पिता नए-नवेले राज्य का मुख्यमंत्री है, उसी की बेटी दिल्ली में जाकर यह कहती है कि कश्मीर और तेलंगाना भारत का हिस्सा नहीं है। कश्मीर का मुद्दा कितना संवेदनशील है, यह बात पूरी ‍दुनिया जानती है।

देश के वरिष्ठ पत्रकार वेदप्रताप वैदिक ने जब कश्मीर के मुद्दे पर अपनी जुबां खोली तो पूरा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और राजनेता उन पर पिल पड़े लेकिन टीआरएस सांसद ने जो विवादास्पद बयान दिया, उसका क्या? यदि 'डेली टाइम्‍स' कविता के बयान को नहीं छापता तो पता ही नहीं चलता कि एक चुनी हुई प्रतिनिधि क्या कह रहीं हैं।

न‍ई दिल्ली। तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस) सांसद के. कविता का अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में बना हुआ है। कविता ने यह बयान देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है कि जम्मू कश्मीर और तेलंगाना भारत का हिस्सा नहीं हैं। उनके इस बयान को 'डेली टाइम्‍स' ने प्रकाशित किया है।
कविता के बयान को पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान किस तरह से लेगा, यह समझा जाना जरूरी है। राजनेता विवादास्पद बयान देकर सुर्खियां बटोरने में माहिर होते हैं लेकिन जब देश की संप्रभुता और अखंडता का सवाल आता है तो जनप्रतिनिधि को इससे बचना चाहिए।



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