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Narak chaturdashi 2024: नरक चतुर्दशी पर हनुमानजी की पूजा क्यों करते हैं, क्या है इसका खास महत्व?

कार्तिक मास कृष्ण चतुर्दशी को मनायी जाती है हनुमान जयंती

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 29 अक्टूबर 2024 (17:28 IST)
Hanuman Jayanti 2024: 30 अक्टूबर 2024 की शाम को नरक चतुर्दशी की पूजा होगी और 31 अक्टूबर को प्रात: रूप चौदस का अभ्यंग स्नान होगा। नरक चतुर्दशी के दिन श्रीकृष्‍ण, यमदेव और भगवान हनुमानजी की पूजा होती है। हनुमानजी की पूजा विशेषकर होती है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी यानी नरक चतुर्दशी को हनुमानजी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन का खास महत्व माना गया है।
उत्तर भारत में चैत्र माह की पूर्णिमा को, दक्षिण भारत कुछ क्षेत्र में कार्तिक माह की नरक चतुर्दशी को, तमिलानाडु और केरल में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को तथा उड़ीसा में वैशाख महीने के पहले दिन मनाई जाती है। श्रीराम के जन्म के पूर्व हनुमानजी का जन्म हुआ था। प्रभु श्रीराम का जन्म 5114 ईसा पूर्व अयोध्या में हुआ था।
 
चैत्र माह की पूर्णिमा: कहते हैं कि चैत्र पूर्णिमा को मेष लग्न और चित्रा नक्षत्र में प्रातः 6:03 बजे हनुमानजी का जन्म एक गुफा में हुआ था। मतलब यह कि चैत्र माह में उनका जन्म हुआ था। फिर चतुर्दर्शी क्यों मनाते हैं?
 
कार्तिक कृष्‍ण पक्ष की चतुर्दशी: वल्मीकि रचित रामायण के अनुसार हनुमानजी का जन्म कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मंगलवार के दिन, स्वाति नक्षत्र और मेष लग्न में हुआ था। फिर चैत्र पूर्णिमा को क्यों मनाते हैं?
पूजा का सबसे सही तरीका- कैसे करें हनुमान पूजा (How to do Hanuman Puja) :
 
1. प्रात:काल स्नान-ध्यान से निवृत हो व्रत का संकल्प लें और पूजा की तैयारी करें।
 
2. नित्य कर्म से निवृत्त होने के बाद हनुमानजी की मूर्ति या चि‍त्र को लाल या पीला कपड़ा बिछाकर लकड़ी के पाट पर रखें और आप खुद कुश के आसन पर शुद्ध और पवित्र वस्त्र पहनकर बैठें।
 
3. मूर्ति को स्नान कराएं और यदि चित्र है तो उसे अच्छे से साफ करें। इसके बाद धूप, दीप प्रज्वलित करके पूजा प्रारंभ करें।
 
4. हनुमानजी को अनामिका अंगुली से तिलक लगाएं, सिंदूर अर्पित करें, गंध, चंदन आदि लगाएं और फिर उन्हें हार और फूल चढ़ाएं।
 
5. अच्छे से पंचोपचार पूजा करने के बाद उन्हें प्रसाद या नैवेद्य (भोग) अर्पित करें। नमक, मिर्च और तेल का प्रयोग नैवेद्य में नहीं किया जाता है।
 
6. अंत में हनुमानी की आरती उतारें और उनकी आरती करें। उनकी आरती करके नैवेद्य को पुन: उन्हें अर्पित करें और अंत में उसे प्रसाद रूप में सभी को बांट दें।
Hanuman Jayanti 2024
हनुमान पूजा के नियम (Rules of Hanuman Chalisa Paath):
 
1. हनुमान पूजा में शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा स्थल की साफ सफाई अच्‍छे से कर लें।
 
2. हनुमान पूजा एक पवित्र जगह पर बैठकर ही करना चाहिए। खासकर या तो आपके घर के पूजास्थल पर, मंदिर में, तीर्थ क्षेत्र में या पहले से नियुक्त साफ सफाई करके पवित्र की गई जगह पर।
 
3. हनुमान पूजा को विशेष मुहूर्त में ही करें या सुबह और शाम को ही करें।
 
4. हनुमान पूजा- पाठ के दौरान उपयोग किए गए फूल लाल रंग के रखें।
 
5. हनुमान पूजा के पहले दीप प्रज्वलित जरूर करना चाहिए। दीपक में जो बाती लगाई जा रही है वह भी लाल सूत (धागे) की होनी चाहिए। किसी भी स्थल पर पूजा करने के पूर्व दीप जरूर प्रज्वलित करें। हनुमान पूजा के दौरान जो दीपक जला रहे हों उसमें चमेली का तेल या शुद्ध घी होना चाहिए।
 
6. हनुमानजी पूजा के बाद आरती करें और फिर उन्हें गुड़ और चने का प्रसाद जरूर ‍अर्पित करें। इसके आलावा चाहें तो केसरिया बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू, चूरमा, मालपुआ या मलाई मिश्री का भोग लगाएं।
 
7. हनुमानजी पूजा के दौरान सिर्फ एक वस्त्र पहनकर ही पूजा करें।
 
9. हनुमान मूर्ति या चित्र को लकड़ी के पाठ पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करें और खुद कुश के आसन पर बैठकर ही पूजा करें।
 
हनुमान पूजा की 10 सावधानियां- (10 Precautions Of Hanuman Puja) :
 
1. जिस दिन पूजा करना हो उसके एक दिन पूर्व से ही मांस, मदिरा आदि का सेवन करना छोड़ दें।
 
2. जिस दिन पूजा करना हो उसके एक दिन पूर्व से ही ब्रह्मचर्य का पालन करना प्रारंभ करें और मन में किसी भी प्रकार का कामुक विचार न रखें।
 
3. हनुमान पूजा के बीच में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्सपन्न न हो इसका ध्यान रखें।
 
4. यदि घर में सूतककाल चल रहा है तो पूजा न करें।
5. हनुमान पूजा में तुलसी, चरणामृत या पंचामृत का उपयोग नहीं करें।
 
6. महिलाएं हनुमानजी को वस्त्र, जनेऊ या चोला अर्पित न करें।
 
7. महिलाओं को महावारी के दौरान पूजा से दूर रहना चाहिए।
 
8. हनुमानजी की किसी भी प्रकार से तांत्रिक पूजा नहीं की जानी चाहिए।
 
9. हनुमानजी का व्रत रख रहे हैं तो नमक, मिर्च और अनाज के सेवन से बचें।
 
10. हनुमानजी को अर्पित किए गए भोग या प्रसाद शुद्ध घी में बने हुए होना चाहिए।

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