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गुरु नानक देव जयंती : एक ओंकार से लेकर गुरप्रसाद तक हर मंत्र है खास, पढ़ें जानकारी

Updated: गुरुवार, 22 नवंबर 2018 (15:41 IST)
- सतमीत कौर
 
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की वाणी का आरंभ मूल मंत्र से होता है। ये मूल मंत्र हमें उस परमात्मा की परिभाषा बताता है जिसकी सब अलग-अलग रूप में पूजा करते हैं।
 
एक ओंकार : अकाल पुरख (परमात्मा) एक है। उसके जैसा कोई और नहीं है। वो सब में रस व्यापक है। हर जगह मौजूद है। 
 
सतनाम : अकाल पुरख का नाम सबसे सच्चा है। ये नाम सदा अटल है, हमेशा रहने वाला है। 
 
करता पुरख : वो सब कुछ बनाने वाला है और वो ही सब कुछ करता है। वो सब कुछ बनाके उसमें रच-बस गया है। 
 
निरभऊ : अकाल पुरख को किसी से कोई डर नहीं है। 
 
निरवैर : अकाल पुरख का किसी से कोई बैर (दुश्मनी) नहीं है।
 
अकाल मूरत : प्रभु की शक्ल काल रहित है। उन पर समय का प्रभाव नहीं पड़ता। बचपन, जवानी, बुढ़ापा मौत उसको नहीं आती। उसका कोई आकार कोई मूरत नहीं है। 
 
अजूनी : वो जूनी (योनियों) में नहीं पड़ता। वो ना तो पैदा होता है ना मरता है। 
 
स्वैभं :(स्वयंभू) उसको किसी ने न तो जनम दिया है, न बनाया है वो खुद अवतरित हुआ है। 
 
गुरप्रसाद : गुरु की कृपा से परमात्मा हृदय में बसता है। गुरु की कृपा से अकाल पुरख की समझ इंसान को होती है।

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