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नाग पंचमी कब है, जानिए सभी पौराणिक नागों के नाम

Updated: शुक्रवार, 13 अगस्त 2021 (10:17 IST)
Nag panchami
नाग पंचमी का त्योहार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन नागों की पूजा प्रधान रूप से की जाती है। कुछ प्रदेशों में चैत्र व भाद्रपद शुक्ल पंचमी के दिन भी नाग पंचमी मनाई जाती है। इस बार अंग्रेजी माह के अनुसार 13 अगस्त 2021 शुक्रवार को शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागपंचमी का त्योहार रहेगा। आओ जानते हैं सभी नागों के नाम।
 
 
1. अष्टनागों के नाम है- अनन्त, वासुकि, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख।
 
2. भारत में उपरोक्त आठों के कुल का ही क्रमश: विस्तार हुआ जिनमें निम्न नागवंशी रहे हैं- नल, कवर्धा, फणि-नाग, भोगिन, सदाचंद्र, धनधर्मा, भूतनंदि, शिशुनंदि या यशनंदि तनक, तुश्त, ऐरावत, धृतराष्ट्र, अहि, मणिभद्र, अलापत्र, कम्बल, अंशतर, धनंजय, कालिया, सौंफू, दौद्धिया, काली, तखतू, धूमल, फाहल, काना, गुलिका, सरकोटा, कालिया, अश्वसेन इत्यादी नाम के नाग वंश हैं।
 
3. अग्निपुराण में 80 प्रकार के नाग कुलों का वर्णन है, जिसमें वासुकी, तक्षक, पद्म, महापद्म प्रसिद्ध हैं। जिस तरह सूर्यवंशी, चंद्रवंशी और अग्निवंशी माने गए हैं उसी तरह नागवंशियों की भी प्राचीन परंपरा रही है। महाभारत काल में पूरे भारत वर्ष में नागा जातियों के समूह फैले हुए थे। अथर्ववेद में कुछ नागों के नामों का उल्लेख मिलता है। ये नाग हैं श्वित्र, स्वज, पृदाक, कल्माष, ग्रीव और तिरिचराजी नागों में चित कोबरा (पृश्चि), काला फणियर (करैत), घास के रंग का (उपतृण्य), पीला (ब्रम), असिता रंगरहित (अलीक), दासी, दुहित, असति, तगात, अमोक और तवस्तु आदि।
 
4. पौराणिक कथाओं के अनुसार पाताल लोक में कहीं एक जगह नागलोक था, जहां मानव आकृति में नाग रहते थे। कहते हैं कि 7 तरह के पाताल में से एक महातल में ही नागलोक बसा था, जहां कश्यप की पत्नी कद्रू और क्रोधवशा से उत्पन्न हुए अनेक सिरों वाले नाग और सर्पों का एक समुदाय रहता था। उनमें कहुक, तक्षक, कालिया और सुषेण आदि प्रधान नाग थे।
 
5. नाग देवों की माता का नाम कद्रू है और पिता का नाम कश्यप।
 
6. नाग देवों की बहन मां मनसा देवी है।
 
7. शिवजी के गले में वासुकि नामक नाग लिपटा रहता है।
 
8. भगवान विष्णुजी शेषनाग की शैय्या पर सोते हैं।
 
9. खांडववन में जब आग लगाई थी तो अश्वसेन नामक का नाग बच गया था जो अर्जुन से बदला लेना चाहता था।
 
10. राजा परीक्षित तो जब तक्षक नाग ने डंस लिया था तो उनके मरने के बाद उनके पुत्र जनमेजय ने नागयज्ञ करने सभी नागों को मार दिया था जिसमें वासुकि, तक्षक और कर्कोटक नामक नाग बच गए थे। वासुकि और तक्षक को इंद्र ने बचाया तो कर्कोटक उज्जैन में महाकाल की शरण में रहकर बच गए।

लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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